मेरठ: कांवड़ यात्रा से पहले डीजे संचालकों ने उठाई पाबंदियों पर राहत की मांग, राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई से की मुलाकात

मेरठ

मेरठ जनपद में आगामी कांवड़ यात्रा के शुरू होने से पहले मेरठ के डीजे और साउंड संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

मेरठ जनपद में आगामी कांवड़ यात्रा के शुरू होने से पहले मेरठ के डीजे और साउंड संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर लगने वाली तरह-तरह की प्रशासनिक पाबंदियों से परेशान होकर ‘मेरठ डीजे एंड साउंड एसोसिएशन’ के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई से मुलाकात की। संचालकों ने अपनी समस्याओं का एक मांग पत्र सौंपकर सरकार से राहत दिलाने की गुहार लगाई है।

सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई ने संचालकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस गंभीर मुद्दे पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के उच्चाधिकारियों व नेतृत्व से बातचीत करेंगे। सांसद ने कहा कि यदि दोनों राज्यों की सरकारें इस विषय पर एक आम राय बना लेती हैं, तो डीजे संचालकों की परेशानी का काफी हद तक समाधान हो सकता है।

पिछले साल लगी थीं ऊंचाई और चौड़ाई पर सख्त पाबंदियां

कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाले हादसों, ट्रैफिक जाम और बिजली के तारों (हाईटेंशन लाइनों) से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार हर साल कड़े नियम और मानक तय करती है।

पिछले साल का नियम: पिछले साल प्रशासन ने कांवड़ में शामिल होने वाले डीजे की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट निर्धारित कर दी थी।

संचालकों का तर्क: डीजे एंड साउंड एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इन सख्त पाबंदियों और भारी-भरकम मशीनों पर रोक के कारण उनके कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा था।

चूंकि कांवड़ यात्रा का सीजन डीजे व्यवसायियों के लिए कमाई का मुख्य जरिया होता है, इसलिए संचालकों ने इस बार यात्रा शुरू होने से काफी पहले ही लामबंद होकर अपनी बात सरकार और शासन तक पहुंचाने की पहल शुरू कर दी है, ताकि समय रहते नियमों में कुछ व्यावहारिक ढील मिल सके।

 

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