नेपाल
भारत-नेपाल खुली सीमा का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय वाहन तस्करी और हाईटेक फर्जीवाड़े के नेटवर्क का नेपाल के बुटवल में सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है।फर्जी नेपाली नंबर प्लेट, नकली बिलबुक और जाली सरकारी मुहरों का खेल खत्म; पुलिस ने दबोचे 4 शातिर आरोपी।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

भारत-नेपाल खुली सीमा का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय वाहन तस्करी और हाईटेक फर्जीवाड़े के नेटवर्क का नेपाल के बुटवल में सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। भारत के विभिन्न राज्यों व सीमावर्ती इलाकों से चोरी की गई मोटरसाइकिलों और स्कूटरों को नेपाल लाकर उन्हें ‘वैध’ बनाने वाले एक संगठित गिरोह को पुलिस ने दबोच लिया है। यह गिरोह चोरी की गाड़ियों पर फर्जी नेपाली नंबर प्लेट लगाने, नकली बिलबुक (आरसी) तैयार करने और सरकारी कार्यालयों की जाली मुहरों का इस्तेमाल कर उन्हें धड़ल्ले से बाजार में बेच रहा था।
ज्वाइंट ऑपरेशन में दबोचे गए 4 मास्टरमाइंड
भारत-नेपाल खुली सीमा का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय वाहन तस्करी और हाईटेक फर्जीवाड़े के नेटवर्क का नेपाल के बुटवल में सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है।फर्जी नेपाली नंबर प्लेट, नकली बिलबुक और जाली सरकारी मुहरों का खेल खत्म; पुलिस ने दबोचे 4 शातिर आरोपी। pic.twitter.com/Z6HM3eqTgK
— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 9, 2026
एक सटीक और गोपनीय सूचना के आधार पर इलाका प्रहरी कार्यालय बुटवल और जिला प्रहरी कार्यालय रुपन्देही की संयुक्त पुलिस टीम ने संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने गिरोह के चार मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान:
अशोक सारू (निवासी- बुटवल)
सरोज उपाध्याय (निवासी- बुटवल)
महेन्द्र गुरुङ (निवासी- बुटवल)
विकास केसी (निवासी- बुटवल)
के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इनमें से कुछ आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है, जिसकी फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं।
छापेमारी में मिला ‘फर्जीवाड़े का मिनी मंत्रालय’
पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई में जो सबूत और सामान बरामद हुए हैं, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। मौके से बरामद सामग्री:
6 मोटरसाइकिल और 3 स्कूटर (चोरी की गाड़ियां)
भारी मात्रा में नकली बिलबुक और दस्तावेज
सरकारी कार्यालयों की फर्जी मुहरें और शाखा अधिकृत (विभागीय अधिकारी) की स्टाम्प
हाईटेक लैपटॉप और कलर प्रिंटर
फर्जी नंबर प्लेट बनाने का कच्चा माल और उपकरण
बरामद किए गए सामानों से साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक बेहद संगठित और शातिर तरीके से चलाया जा रहा इंटरनेशनल सिंडिकेट था।
75 हजार की ‘बुलेट’ ने खोल दिया करोड़ों का राज
इस पूरे नेटवर्क की भनक पुलिस को तब लगी, जब बाजार में एक चमचमाती रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल महज 75,000 नेपाली रुपये में बेचे जाने की इनपुट मिली। इतनी कम कीमत पर बुलेट मिलने के शक ने पुलिस को अलर्ट किया। जब जांच की कड़ियां जोड़ी गईं, तो पता चला कि गिरोह कई गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे खपा चुका है। इतना ही नहीं, जालसाजी का आलम यह था कि कई अलग-अलग वाहनों पर एक ही नंबर प्लेट का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
मामले की जानकारी देते हुए इलाका प्रहरी कार्यालय बुटवल के डीएसपी निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों के खिलाफ वाहन चोरी, सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि इस गिरोह के तार भारत के किन-किन शहरों और नेपाल के किन जिलों से जुड़े हैं, और अब तक कितनी गाड़ियां सीमा पार कराकर बेची जा चुकी हैं।इस कार्रवाई के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय अन्य वाहन चोरों और तस्करों में हड़कंप मच गया है।
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