बाहर ताला, अंदर धड़ल्ले से ऑपरेशन: सिद्धार्थनगर के फर्जी अस्पताल में आधी रात छापा, बेड के नीचे छिपा मिला ‘झोलाछाप डॉक्टर’

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा कस्बे में स्थित ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ में शनिवार देर रात स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा कस्बे में स्थित ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ में शनिवार देर रात स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस अस्पताल को पूर्व में हुई एक नवजात की मौत के बाद जांच पूरी होने तक पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया था, वहां मुख्य गेट पर बाहर से ताला लटकाकर अंदर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान खुद को डॉक्टर बताकर प्रसूताओं का ऑपरेशन करने वाला मुख्य आरोपी युवक अस्पताल के एक बेड के नीचे छिपा मिला, जिसे टीम ने दबोच लिया।

ताला खुलवाकर अंदर घुसी टीम, तो खुला राज

स्वास्थ्य विभाग के नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेन्द्र पाल, इटवा तहसीलदार, प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा और सीएचसी इटवा के अधीक्षक की संयुक्त टीम ने शनिवार रात करीब 11:30 बजे अस्पताल पर अचानक धावा बोल दिया। शुरुआती तौर पर मुख्य गेट पर ताला लटका देख ऐसा लगा कि अस्पताल बंद है। लेकिन जब ताला खुलवाकर टीम अंदर दाखिल हुई तो चारों तरफ अंधेरा था और अधिकांश लाइटें बंद थीं। गहन तलाशी लेने पर अंदर का नजारा देख अधिकारी दंग रह गए; वहां कई मरीज, उनके तीमारदार और अस्पताल का स्टाफ मौजूद था।

बेड के नीचे छिपा मिला मुख्य आरोपी प्रवीण यादव

अधिकारियों ने जब अस्पताल में भर्ती दो मरीजों और उनके परिजनों से पूछताछ की, तो पता चला कि दोनों मरीजों का ऑपरेशन शनिवार रात में ही किया गया था। हैरानी की बात यह थी कि मौके पर कोई भी पंजीकृत या विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। तलाशी के दौरान खुद को डॉक्टर बताने वाला प्रवीण यादव अस्पताल के एक कमरे में बेड के नीचे दुबका मिला। प्रवीण पर आरोप है कि वह बिना किसी वैध डिग्री के प्रसूताओं के जटिल ऑपरेशन करता था। संयुक्त टीम ने प्रवीण यादव और दो महिला कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया और अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। वहीं, दोनों गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

पहले भी ले चुका है नवजात की जान

जनता सेवा हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता है। बीते 23 मई की रात को प्रसव के लिए भर्ती कराई गई बंदना नामक महिला के ऑपरेशन के बाद उसके नवजात शिशु की मौत हो गई थी, जबकि महिला की हालत भी अत्यंत नाजुक हो गई थी। पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाया था कि यह ऑपरेशन किसी विशेषज्ञ डॉक्टर ने नहीं, बल्कि इसी फर्जी डॉक्टर प्रवीण यादव और उसके सहयोगियों ने किया था। इस शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था और मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच टीम गठित कर अस्पताल के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।

सीलिंग के बाद साक्ष्य जुटाने में लगी पुलिस

प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ाकर बाहर ताला बंद कर अंदर अवैध रूप से सिजेरियन ऑपरेशन थियेटर चलाने के इस खेल के पर्दाफाश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के दस्तावेज, भर्ती रजिस्टर और ऑपरेशन रिकॉर्ड को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस अब इस बिंदु पर गहनता से तफ्तीश कर रही है कि सील रहने के बावजूद यह अस्पताल किसके संरक्षण में चल रहा था और पूर्व में हुई नवजात की मौत के मामले में असली गुनाहगार कौन-कौन हैं।

 

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