अलीगढ़ में कुदरत के कहर से अन्नदाता के माथे पर गहराई चिंता की लकीरें, बारिश ने किसानों के मेहनत पर फेरा पानी

अलीगढ़ 

जनपद अलीगढ़ में बारिश ने इस कदर किसानों पर ऐसा कहर बरपाया है, जिससे उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

अलीगढ़ जनपद में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश ने कहर बरपा रखा है, जिससे समूचे क्षेत्र में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे भयावह स्थिति खेती-किसानी की है, जहाँ कुदरत के इस कहर ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। वर्तमान में खेती का कार्य पूरी तरह बाधित हो चुका है, और खेतों में लबालब भरा पानी किसान के सपनों को डुबोता नजर आ रहा है।

महंगाई की मार और कुदरत का प्रहार आज के इस दौर में, जहाँ खाद, बीज और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, किसान जैसे-तैसे कर्ज और तिनका-तिनका जोड़कर अपनी फसल को पालता है। एक-एक पौधे को बच्चे की तरह सींचने वाला किसान जब अपनी आँखों के सामने तैयार फसल को बर्बाद होते देखता है, तो उसकी कमर टूट जाती है। यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि एक परिवार की साल भर की उम्मीदों का टूटना है।

अन्नदाता खुद बेहाल यह विडंबना ही है कि जो किसान पूरे जमाने का पेट भरने के लिए दिन-रात मिट्टी से सोना उगाता है, आज वही प्राकृतिक आपदाओं के चलते खुद परेशानी के दौर से गुजर रहा है। अतिवृष्टि ने न केवल फसलों को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में जलभराव के कारण चारे का संकट भी खड़ा कर दिया है, जिससे पशुपालन पर भी संकट मंडरा रहा है।

निष्कर्ष अलीगढ़ का किसान आज बेबस होकर आसमान की ओर देख रहा है। “जमाने को पालने वाला आज खुद दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर है।” प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजे की घोषणा करे, ताकि इस आर्थिक तंगी और आपदा के दौर में किसान को संबल मिल सके।

 

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