लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी जनपदके देशभर में चर्चित रहे लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा मामले की अदालती पैरवी को लेकर विवाद गहरा गया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

लखीमपुर खीरी जनपदके देशभर में चर्चित रहे लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा मामले की अदालती पैरवी को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के सेवानिवृत्त (रिटायर) होने के बाद, प्रशासन द्वारा एक जूनियर और कम अनुभवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) को प्रभारी डीजीसी का कार्यभार सौंप दिया गया है। इस फैसले पर अब किसान पक्ष ने कड़ा एतराज जताया है।
मृतक पत्रकार के भाई ने उठाए पैरवी पर सवाल
तिकुनिया हिंसा मामले के मुख्य गवाह और घटना में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के भाई पवन कश्यप ने सोमवार को जिलाधिकारी (डीएम) से मुलाकात कर एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि तिकुनिया हिंसा जैसा अति-संवेदनशील और गंभीर मुकदमा, जिसमें पूरे देश की नजरें टिकी हैं, उसकी पैरवी किसी बेहद अनुभवी और वरिष्ठ सरकारी अधिवक्ता द्वारा ही की जानी चाहिए।
नक्शा नजरी जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य को साबित करने में चूक का आरोप
प्रार्थना पत्र में अभियोजन पक्ष की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि हाल ही में कोर्ट में हुई गवाही के दौरान भारी लापरवाही देखने को मिली। आरोप है कि अभियोजन साक्षी प्रभारी निरीक्षक बालेन्दु गौतम की गवाही के वक्त घटना स्थल के ‘नक्शा नजरी’ जैसे सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी साक्ष्य को न्यायालय के समक्ष विधिवत साबित नहीं कराया जा सका। किसान पक्ष का मानना है कि इस तरह की विधिक चूक से पूरा मुकदमा और अभियोजन पक्ष कमजोर हो सकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दरकिनार करने पर आपत्ति
पवन कश्यप ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया है कि खीरी जनपद में वर्तमान समय में कई वरिष्ठ और काबिल सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता उपलब्ध हैं, जिन्हें बड़े और पेचीदा आपराधिक मामलों की पैरवी करने का दशकों का लंबा अनुभव है। ऐसे वरिष्ठों की मौजूदगी के बावजूद किसी जूनियर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना समझ से परे है।
डीएम से त्वरित कार्रवाई की गुहार
किसान पक्ष ने जिलाधिकारी से पुरजोर मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस मुकदमे की प्रभावी और निष्पक्ष पैरवी सुनिश्चित कराई जाए। इसके लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिवक्ता को तुरंत प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) के पद पर नियुक्त किया जाए, ताकि पीड़ितों को सही मायने में न्याय मिल सके।
मुख्य बिंदु: तिकुनिया हिंसा मामले में साक्ष्यों को सही तरीके से कोर्ट के सामने न रख पाना अभियोजन की एक बड़ी कमजोरी के रूप में उभरा है। अब देखना यह होगा कि इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन सरकारी वकीलों के इस पैनल में क्या फेरबदल करता है।
टूटती सड़क दे रही मौत को दावत, ग्रामीणों में भारी आक्रोश; ज्ञापन के बाद भी जिम्मेदार मौनhttps://t.co/wpu91ReqUL
— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 20, 2026













