लखीमपुर खीरी
औरैया के चर्चित डॉ. सौरभ बाजपेयी आत्महत्या प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ पूरी तरह से मुखर हो गया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

औरैया के चर्चित डॉ. सौरभ बाजपेयी आत्महत्या प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ पूरी तरह से मुखर हो गया है। सोमवार को महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष एवं पूर्व बार काउंसिल अध्यक्ष अजय कुमार शुक्ल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक तीखा ज्ञापन भेजा है। इस ज्ञापन में मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक (इंस्पेक्टर) की तत्काल गिरफ्तारी की पुरजोर मांग की गई है।
वेतन मांगने पर मारपीट और बंधक बनाने का आरोप
ज्ञापन में घटना की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया गया कि लखीमपुर खीरी के ग्राम शेखापुर के मूल निवासी डॉ. सौरभ बाजपेयी औरैया स्थित ‘रामऔतार मेमोरियल हॉस्पिटल’ में अपनी सेवाएं दे रहे थे। आरोप है कि जब उन्होंने प्रबंधन से अपना बकाया वेतन मांगा, तो अस्पताल संचालक और उसके साथियों ने उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की, उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और कथित रूप से बंधक बनाकर घोर अपमानित किया।
पुलिस की निष्क्रियता और मिलीभगत का आरोप
अधिवक्ता महासंघ का सीधा आरोप है कि इस अमानवीय घटना के बाद डॉ. सौरभ ने न्याय की आस में कोतवाली औरैया में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने मामले में कोई प्रभावी या ठोस कार्रवाई नहीं की। महासंघ ने गंभीर आरोप लगाया कि पुलिस की कथित निष्क्रियता और आरोपियों से सांठगांठ के कारण डॉ. सौरभ गहरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए और अंततः उन्हें आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा।
आरोपियों पर रासुका और इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी की मांग
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में महासंघ ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक की भूमिका की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही थाना कोतवाली औरैया में दर्ज अपराध संख्या 483/2026 के नामजद मुख्य आरोपियों के साथ-साथ तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक को भी तत्काल गिरफ्तार करने की मांग उठाई गई है।
महासंघ ने अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई करने तथा पीड़ित व बेसहारा हुए आश्रित परिवार को सरकारी नौकरी व उचित मुआवजा देने की भी वकालत की है।
मुख्य सवाल: एक डॉक्टर को न्याय न मिलने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसने अब पूरे प्रदेश के बुद्धिजीवी वर्ग को झकझोर दिया है। अधिवक्ता महासंघ का स्पष्ट कहना है कि जब तक पुलिस विभाग के काली भेड़ों और दबंग आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पीड़ित परिवार को न्याय मिलना असंभव है।
टूटती सड़क दे रही मौत को दावत, ग्रामीणों में भारी आक्रोश; ज्ञापन के बाद भी जिम्मेदार मौनhttps://t.co/wpu91ReqUL
— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 20, 2026













