गाजियाबाद: 13 साल के संघर्ष के बाद शांत हुई हरीश राणा की सांसें, अंगदान कर पेश की मानवता की मिसाल

गाजियाबाद

राजनगर एक्सटेंशन की एक सोसाइटी में मंगलवार को उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब 13 वर्षों तक कोमा में रहने वाले 33 वर्षीय हरीश राणा के निधन की खबर आई। दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

राजनगर एक्सटेंशन की एक सोसाइटी में मंगलवार को उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब 13 वर्षों तक कोमा में रहने वाले 33 वर्षीय हरीश राणा के निधन की खबर आई। दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। हरीश का जीवन और उनके परिवार का संघर्ष समाज के लिए धैर्य और सेवा की एक अविस्मरणीय गाथा बन गया है।

2013 के उस हादसे ने बदल दी थी जिंदगी

जानकारी के अनुसार बताते चले की साल 2013 में चंडीगढ़ में बीटेक की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के कारण हरीश को गंभीर ब्रेन इंजरी हुई थी। तब 20 साल के रहे हरीश उसके बाद कभी होश में नहीं आए। पिछले 13 वर्षों से उनके पिता अशोक राणा, माता निर्मला और भाई आशीष ने उनकी सेवा में दिन-रात एक कर दिया। आर्थिक तंगी और मानसिक पीड़ा के बावजूद परिवार ने कभी हार नहीं मानी। पिता ने परिवार चलाने के लिए होटल की नौकरी छोड़ स्प्राउट्स और सैंडविच का व्यवसाय तक शुरू किया।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इच्छामृत्यु की अनुमति

इलाज में लाखों रुपये खर्च करने और कोई सुधार न होने पर थक-हारकर परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय से इच्छामृत्यु की गुहार लगाई थी। लगभग 13 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को सम्मानजनक मृत्यु की अनुमति दी थी, जिसके बाद उन्हें एम्स ले जाया गया था।

अंगदान से दूसरों को मिलेगा जीवन

हरीश के निधन के बाद उनके परिवार ने एक साहसी और मानवीय निर्णय लिया है। उन्होंने हरीश के अंगदान की अनुमति दी है। अब हरीश का दिल किसी और के सीने में धड़केगा और उनकी आंखें किसी और के जीवन में उजाला करेंगी। उनके इस फैसले की पूरी सोसाइटी और क्षेत्र में सराहना हो रही है।

अंतिम विदाई

ब्रह्माकुमारी आश्रम की रूपा दीदी के शब्द, सबको माफ करते हुए और सबको माफी देते हुए जाओ, आज भी लोगों के कानों में गूंज रहे हैं। हरीश राणा का अंतिम संस्कार बुधवार को दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में किया जाएगा।

 

 

Voice Of News 24