मऊ

मऊ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं (समूह सखियों व कैडरों) ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

मऊ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं (समूह सखियों व कैडरों) ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित 6 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर मानदेय वृद्धि, संसाधन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई।
2,000-4,000 रुपये मानदेय में काम करना बेहद मुश्किल
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि वर्तमान में उन्हें मात्र 2,000 से 4,000 रुपये का अल्प मानदेय दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई और उनके द्वारा किए जा रहे जमीनी कार्यों की तुलना में बेहद कम है। उन्होंने मांग की कि उनका मासिक मानदेय बढ़ाकर कम से कम 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए और यह राशि सीधे उनके व्यक्तिगत बैंक खातों में भेजी जाए।
स्मार्टफोन, रीचार्ज भत्ता और मानदेय के सीधे भुगतान की मांग
समूह सखियों ने बताया कि विभागीय सर्वे और ऑनलाइन रिपोर्टिंग के लिए उन्हें निजी मोबाइल का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि काम को सुगम बनाने के लिए स्मार्टफोन या टैबलेट उपलब्ध कराया जाए तथा प्रतिमाह मोबाइल रीचार्ज भत्ता भी दिया जाए।
5 लाख का स्वास्थ्य बीमा और संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग
महिलाओं की 6 मुख्य मांगों में आयुष्मान/कैशलेस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना तथा अस्थायी/संविदा कर्मियों को स्थायी (नियमित) किया जाना शामिल है।
प्रदर्शन में रीमा, शकुंतला, कुसुम, सरिता सहित बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) September 25, 2026













