विज्ञप्ति: राधा और कृष्ण में नहीं है कोई भेद भागवताचार्य डॉ. दीपक गौतम; बड़ौत में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

बागपत

बागपत जनपद के बड़ौत श्री पंचवटी मंदिर सेवा समिति के द्वारा बड़ौत में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कथा का शुभारंभ मोहित गुप्ता, अमित गुप्ता और शोभित गुप्ता परिवार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं व्यास पीठ पूजन कर किया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

बागपत जनपद के बड़ौत श्री पंचवटी मंदिर सेवा समिति के द्वारा बड़ौत में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कथा का शुभारंभ मोहित गुप्ता, अमित गुप्ता और शोभित गुप्ता परिवार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं व्यास पीठ पूजन कर किया गया। इस दौरान संगीतमय और भावपूर्ण कथा सुनकर उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

भगवान की विभिन्न लीलाओं और पंच महाभूतों का उद्धार

नंदोत्सव के पश्चात भागवताचार्य डॉ. दीपक जी महाराज ने भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने अपनी लीलाओं के माध्यम से पंच महाभूतों का उद्धार किया:

आकाश तत्व: शकटासुर के रूप में आकाश तत्व का उद्धार हुआ।

वायु तत्व: तृणावत के वध से वायु तत्व का उद्धार किया गया।

पृथ्वी तत्व: ब्रज की पावन रज का भक्षण कर पृथ्वी तत्व का उद्धार हुआ।

जल तत्व: कालिया नाग मर्दन से जल तत्व का शुद्धिकरण पूर्ण किया गया।

अग्नि तत्व: अग्निपान करके अग्नि तत्व को शुद्ध बनाया गया।

इसके अलावा, बकासुर वध के माध्यम से पाखंड का विनाश करते हुए शुद्ध मन का महत्व बताया गया। बकासुर का अर्थ स्पष्ट करते हुए महाराज जी ने कहा कि जो दिखाता कुछ और है और करता कुछ और है, वही बगुला (बकासुर) है। अघासुर वध से पाप मुक्ति का मार्ग बताया गया, जहाँ ‘अघ’ का अर्थ पाप है।

चीर हरण, गोवर्धन लीला और राधा-कृष्ण का संबंध

भगवान की चीर हरण लीला पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह आज के समय में बहुत प्रासंगिक हो गया है। इसके माध्यम से मर्यादा में रहना सिखाया गया तथा अज्ञान रूपी वस्त्रों का हरण कर ज्ञान का दर्शन कराया गया, जिससे समाज की मर्यादा बनी रहे। गोवर्धन लीला के द्वारा पेड़-पौधे, जीव-जंतु और प्रकृति के संरक्षण का उपदेश दिया गया।

राधा अष्टमी का महत्व बताते हुए डॉ. दीपक जी महाराज ने कहा कि राधा और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। राधा भगवान की ह्लादिनी शक्ति हैं और बिना राधा के कृष्ण को प्राप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि राधा जी का प्राकट्य भगवान कृष्ण से पहले हुआ, जिससे भक्त भक्ति के माध्यम से भगवान को आसानी से प्राप्त कर सकें। वृंदावन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा “वृंदावन के वृक्ष का मरम न जाने कोई, यहाँ डाल-डाल और पात-पात पर राधे-राधे होई।”

समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद

कथा कार्यक्रम को सफल बनाने में कथा कमेटी के अध्यक्ष मोहित बिंदल, सचिव मनोज सिंघल, संयोजक नितिन मित्तल, कोषाध्यक्ष मनोज गर्ग, संदीप गर्ग और सुनील मित्तल आदि पदाधिकारी मनोयोग से जुटे रहे। समिति के सदस्यों द्वारा यजमान एवं अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में सोमलता गुप्ता एवं गोविंद जैन परिवार द्वारा भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई।

 

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