औरैया

बिधूना नर्स मेंटर पदम सिंह के साथ कथित मारपीट और गाली-गलौज के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना में धारदार हथियार से हमला किए जाने के बावजूद उनके खिलाफ भी झूठे आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

बिधूना नर्स मेंटर पदम सिंह के साथ कथित मारपीट और गाली-गलौज के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना में धारदार हथियार से हमला किए जाने के बावजूद उनके खिलाफ भी झूठे आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। पदम सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित का कहना है कि यदि उनके ऊपर लगाए गए आरोपों के आधार पर घटना हुई है तो संबंधित स्थान पर उसके भौतिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज अथवा अन्य प्रत्यक्ष प्रमाण भी होने चाहिए। ऐसे में जांच एजेंसियों को आरोपों और वास्तविक घटनाक्रम के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए घटनास्थल की बारीकी से जांच करनी चाहिए।
सीसीटीवी फुटेज सामने आने का दावा, फिर भी जांच पर सवाल
पदम सिंह के मुताबिक उनके साथ हुई घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। उनका दावा है कि फुटेज से वास्तविक घटनाक्रम सामने आ सकता है। वहीं, जिन परिस्थितियों और स्थान को आधार बनाकर उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, वहां भी पुलिस को मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाना चाहिए कि कथित घटना के कोई स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं।
पीड़ित पक्ष का सवाल है कि जब सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल और अन्य साक्ष्यों की जांच से सच्चाई सामने आ सकती है, तो केवल आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर क्रॉस मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई कितनी उचित है?
सत्ता पक्ष के फोन और जातिगत दबाव के आरोप, पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
मामले में सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि किसी सत्ता पक्ष से जुड़े व्यक्ति के कथित फोन के बाद जाति विशेष को लेकर दबाव बनाया गया और इसी दबाव में निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल दो पक्षों के बीच विवाद का नहीं, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और दबावमुक्त जांच का भी बन जाता है। इसलिए इस पूरे दावे की भी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है कि मुकदमा दर्ज करने में किसी बाहरी दबाव की भूमिका थी या नहीं।
क्रॉस केस से न्याय व्यवस्था* *पर भरोसा न टूटे
पीड़ित पदम सिंह का कहना है कि झूठे आरोप लगाकर क्रॉस मुकदमा दर्ज होने से आम व्यक्ति का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है। उनका कहना है कि उन्हें किसी पक्ष विशेष के पक्ष में कार्रवाई नहीं चाहिए, बल्कि झूठ और सच की समान रूप से जांच कर वास्तविक दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिधूना कोतवाली पुलिस इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल के साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की निष्पक्ष जांच करेगी? क्या जांच यह स्पष्ट कर पाएगी कि वास्तव में घटना किस प्रकार हुई और किस पक्ष के आरोप कितने सही हैं?
पदम सिंह ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाए तथा यदि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ गलत तरीके से मुकदमा दर्ज हुआ है तो उसे न्याय दिलाया जाए।
अब निगाहें पुलिस की जांच पर हैं—क्योंकि इस मामले में सवाल सिर्फ मुकदमे का नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और आम नागरिक के न्याय व्यवस्था पर भरोसे का भी है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) September 2, 2026





















