गोरखपुर
दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज, दिग्विजयनाथ बालिका इंटर कॉलेज एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ पी.जी. कॉलेज के संयुक्त तत्त्वावधान में सोमवार को पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज, दिग्विजयनाथ बालिका इंटर कॉलेज एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ पी.जी. कॉलेज के संयुक्त तत्त्वावधान में सोमवार को पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं के बीच उत्तर प्रदेश के राजकीय वृक्ष ‘सीता अशोक’ के 111 बीज एवं ग्रो बैग का निशुल्क वितरण किया गया।

औषधीय, वैज्ञानिक और धार्मिक समृद्धि का प्रतीक है सीता अशोक
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित गोरखपुर के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अश्विनी कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सीता अशोक सराका इंडिका भारत का एक अत्यंत पवित्र, पौराणिक और औषधीय गुणों से भरपूर वृक्ष है। यह न केवल उत्तर प्रदेश का राजकीय वृक्ष है, बल्कि इसका पुष्प ओडिशा का राजकीय पुष्प भी है। वास्तुशास्त्र की दृष्टि से इसे उत्तर दिशा में लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि शोध के अनुसार इसकी छाल, पत्तियों और पुष्पों में टैनिन, फ्लेवोनॉयड, ग्लाइकोसाइड जैसे जैव-सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जो सूजन-रोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध हैं।
स्त्री रोगों के लिए रामबाण है यह वृक्ष: डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव
महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान एवं बागवानी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को इसके औषधीय महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में अशोक को स्त्री-रोगों की सबसे श्रेष्ठ औषधि माना गया है। इसकी छाल से निर्मित ‘अशोकारिष्ट’ मासिक स्राव, श्वेत प्रदर और गर्भाशय संबंधी विकारों में रामबाण की तरह काम करता है। इसके साथ ही, हृदय रोग, त्वचा रोग और बवासीर के रोगी भी चिकित्सकों की सलाह पर इसका उपयोग कर लाभ पा सकते हैं।
धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि रामायण काल में माता सीता ने लंका की जिस वाटिका में निवास किया था, वह यही अशोक वाटिका थी, इसीलिए इसे ‘सीता अशोक’ कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में यह वृक्ष दुःख, भय और शोक को दूर करने वाला तथा सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पर्यावरण संरक्षण में साबित होगा वरदान: डॉ. एस.पी. सिंह
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के वरिष्ठ सदस्य डॉ. एस.पी. सिंह ने संस्थाओं के इस संयुक्त प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बीज और ग्रो बैग का वितरण करना पर्यावरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल बीज न लगाएं, बल्कि उसके अंकुरण से लेकर पौधे के बड़े होने तक उसकी प्रगति के प्रति जिज्ञासु रहें और उसकी देखभाल करें। सीता अशोक का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए बेहद जरूरी है।
इस गरिमामयी और जागरूकता से भरे कार्यक्रम के अवसर पर तीनों ही शिक्षण संस्थाओं के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 20, 2026













