निघासन: ग्रामीण अंचलों में बिना डिग्री व पंजीकरण के चल रहे क्लीनिक, ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

लखीमपुर खीरी

लखीमपुर खीरी तहसील निघासन के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी वैध डिग्री और पंजीकरण के धड़ल्ले से चल रहे अवैध मेडिकल स्टोरों व क्लीनिकों को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


लखीमपुर खीरी तहसील निघासन के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी वैध डिग्री और पंजीकरण के धड़ल्ले से चल रहे अवैध मेडिकल स्टोरों व क्लीनिकों को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने इन कथित ‘झोलाछाप’ क्लीनिकों के संचालन पर कड़ा ऐतराज जताते हुए क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि बिना एमबीबीएस या बीएएमएस जैसी मान्यता प्राप्त डिग्रियों के ही कुछ व्यक्ति अपने बोर्ड पर “डॉक्टर” लिखकर धड़ल्ले से मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड का मनमाना इस्तेमाल

ग्रामीणों के अनुसार, इन अवैध क्लीनिकों पर मरीजों को बिना किसी डॉक्टरी परामर्श और उचित जांच के भारी मात्रा में एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड और हाई-डोज इंजेक्शन मनमाने तरीके से दिए जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पूर्व में भी इन केंद्रों पर गलत इलाज के कारण कई मरीजों की तबीयत बिगड़ने और गंभीर हालत में रेफर होने के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। स्थानीय लोगों ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि इन केंद्रों के बेखौफ संचालन के पीछे स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े कुछ लोगों की मिलीभगत हो सकती है, हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

साक्ष्य जुटाकर जांच की मांग

जांच के दौरान ग्रामीणों ने कई संदिग्ध क्लीनिकों की लोकेशन, उनके बोर्ड पर लिखे भ्रामक शब्द, दवाओं के पर्चे और बिना किसी वैध पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के दिए गए घातक इंजेक्शनों के नमूने साक्ष्य के तौर पर दिखाए हैं। मौके से कई फोटो और वीडियो भी जुटाए गए हैं। जनता की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग इन कथित डॉक्टरों की डिग्री, उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल/आयुष/नर्सिंग काउंसिल का पंजीकरण प्रमाणपत्र, क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन और बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण की रसीदों जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की गहनता से जांच करे।

विशेषज्ञों की राय और प्रशासनिक मौन

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि बिना किसी वैध चिकित्सीय डिग्री के इलाज करना, गंभीर दवाएं लिखना और इंजेक्शन लगाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। यह कृत्य मरीजों के जीवन के लिए सीधा और जानलेवा खतरा पैदा करता है।

अब मुख्य सवाल यह उठता है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर मामला उजागर होने के बाद लखीमपुर खीरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उपजिलाधिकारी निघासन और ड्रग इंस्पेक्टर इन अवैध केंद्रों के खिलाफ क्या रुख अपनाते हैं। ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि तहसील क्षेत्र के सभी क्लीनिकों का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए, फर्जी पाए जाने वाले केंद्रों को सील कर उनके संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। फिलहाल इस पूरे संवेदनशील मामले में सीएमओ खीरी, एसडीएम निघासन या संबंधित सीएचसी अधीक्षक का कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका है।

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