सहारनपुर
सहारनपुर नगर निगम के विद्युत विभाग में तैनात एक कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान एक पत्रकार के साथ गाली-गलौज, मारपीट करने और उनका मोबाइल फोन तोड़ने का गंभीर आरोप लगा है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सहारनपुर नगर निगम के विद्युत विभाग में तैनात एक कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान एक पत्रकार के साथ गाली-गलौज, मारपीट करने और उनका मोबाइल फोन तोड़ने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित पत्रकार ने इस मामले को लेकर महापौर डॉ. अजय कुमार और नगर आयुक्त को एक शिकायती पत्र सौंपकर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
RTI का जवाब न देने और सबूत मिटाने का आरोप
पत्रकार सुरक्षा परिषद फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष (शिकायतकर्ता पत्रकार) के अनुसार, एक खबर प्रकाशित करने से नाराज होकर सरकारी कार्यालय के भीतर उनके साथ यह अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। आरोप है कि कर्मचारी ने उनका मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिया, ताकि उसमें मौजूद वीडियो के रूप में साक्ष्य मिटाए जा सकें। इसके अलावा पीड़ित का दावा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के तहत उनके द्वारा मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियों का जवाब भी विभाग द्वारा दबाया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि शिकायत करने के बाद पीड़ित के तीन लाइसेंस भी रद्द कर दिए गए हैं।
भ्रष्टाचार और कर्मचारियों के उत्पीड़न का मामला
शिकायत पत्र में नगर निगम विद्युत विभाग के भीतर 180 लीटर तेल की पर्चियों में हेराफेरी करने और अन्य कर्मचारियों से अवैध वसूली करने के भी संगीन आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि विभाग के अन्य कर्मचारी नौकरी से हटाए जाने और वेतन काटे जाने की धमकी के कारण डर के मारे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं।
‘घोटालेबाजों का इलाज करें डॉक्टर महापौर’
पीड़ित पत्रकार ने महापौर डॉ. अजय कुमार की कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा, “महापौर जी, आप बिना किसी भेदभाव के जनता की सेवा करते हैं, इसलिए हमें आप पर पूरा विश्वास है। आप खुद एक डॉक्टर हैं, कृपया इस विभाग के घोटालेबाजों का भी उचित इलाज करें और मुझे इंसाफ दिलाएं।” उन्होंने मांग की है कि घटना के दिन की सच्चाई सामने लाने के लिए कार्यालय के हाजिरी रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच कराई जाए।
निष्पक्ष जांच और आधिकारिक पक्ष का इंतजार
इस पूरे प्रकरण में नगर निगम विद्युत विभाग के संबंधित कर्मचारी और प्रशासन का रुख जानना बेहद अहम है। स्थानीय समाचार पत्र ‘जन जागरण संदेश’ ने इस संबंध में नगर निगम प्रशासन से संपर्क साधा है; महापौर और नगर आयुक्त का आधिकारिक पक्ष सामने आते ही उसे भी प्रमुखता से जारी किया जाएगा। कानूनी जानकारों के मुताबिक, सरकारी दफ्तर में कैमरे न होना या फुटेज गायब होना लापरवाही की श्रेणी में आता है, वहीं मारपीट और विज्ञापन के बिना भर्ती जैसे गंभीर आरोपों की जांच शासन और पुलिस स्तर से ही संभव है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) June 8, 2026













