सिद्धार्थनगर: निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत; पेट दबाकर जबरन डिलीवरी का आरोप, डॉक्टर व आशा बहू समेत 4 पर केस दर्ज

लोटन

सिद्धार्थनगर जनपद के लोटन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की घोर लापरवाही के कारण नवजात शिशु की मौत का एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

_

सिद्धार्थनगर जनपद के लोटन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की घोर लापरवाही के कारण नवजात शिशु की मौत का एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार की तहरीर पर लोटन थाना पुलिस ने कमीशन के चक्कर में गुमराह करने वाली आशा बहू, डॉक्टर, जीएनएम और अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह पूरी घटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोटन से महज कुछ ही दूरी पर अवैध रूप से संचालित ‘सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक’ में घटित हुई।

15 दिन में नवजात की मौत का दूसरा मामला, स्वास्थ्य विभाग सोया

सिद्धार्थनगर जिले में प्रसव के दौरान नवजातों की मौत के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले महज 15 दिनों के भीतर लापरवाही के कारण नवजात की मौत का यह दूसरा बड़ा मामला है। इस घटना ने एक बार फिर जिले के स्वास्थ्य विभाग की लचर निगरानी, भ्रष्ट तंत्र और बिना पुख्ता इंतजामों के धड़ल्ले से चल रहे निजी अस्पतालों के काले कारोबार पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

कमीशन के खेल में सरकारी अस्पताल से प्राइवेट ले गई ‘आशा

पीड़ित हरिशंकर मौर्य ने पुलिस को बताया कि मंगलवार सुबह करीब 8 बजे वह अपनी गर्भवती बहू रूबी को प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल ‘सीएचसी लोटन’ लेकर गए थे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद स्थिति को बिल्कुल सामान्य बताया, लेकिन बाद में किसी कारणवश प्रसूता को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।

परिजनों का गंभीर आरोप है कि जैसे ही वे जिला अस्पताल के लिए निकलने वाले थे, तभी गांव की आशा बहू पुष्पा ने मोटा कमीशन पाने के लालच में उन्हें गुमराह किया। आशा बहू ने परिजनों को डराकर जिला अस्पताल न ले जाने दिया और जबरन बहला-फुसलाकर सीधे प्राइवेट ‘सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक’ में भर्ती करवा दिया।

पेट दबाकर जबरन कराई डिलीवरी, बिना टांका लगाए भागी जीएनएम

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर नज़रुल हसन और जीएनएम पूजा जायसवाल ने मरीज का दोबारा अल्ट्रासाउंड किया और सब ठीक होने का दावा किया। परिजनों के अनुसार, रात करीब 8 बजे प्रसव कराते समय क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। डिलीवरी रूम में महिला के पेट को बेरहमी से दबाकर जबरन प्रसव कराने की कोशिश की गई, जिसके अत्यधिक दबाव के कारण गर्भ में पल रहे नवजात की मौके पर ही मौत हो गई।

यही नहीं, अस्पताल प्रशासन ने बच्चे की मौत की खबर को लगभग एक घंटे तक परिजनों से छिपाए रखा। मामला तब और खौफनाक हो गया जब परिजनों ने बच्चे की जानकारी मांगी। आरोप है कि जीएनएम पूजा जायसवाल ने प्रसूता का एक छोटा ऑपरेशन तो कर दिया था, लेकिन बच्चे की मौत से घबराकर वह महिला को बिना टांके लगाए ही तड़पता हुआ छोड़कर अस्पताल से रफूचक्कर हो गई।

परिजनों का हंगामा, मौका पाकर स्टाफ फरार

जब प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी और परिजनों को बच्चे की मौत का पता चला, तो पूरे अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर भारी हंगामा शुरू कर दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस के आने की भनक लगते ही आरोपी डॉक्टर और अस्पताल का अधिकांश स्टाफ ताला लटकाकर मौके से फरार हो चुका था।

इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर आशा बहू पुष्पा, डॉक्टर नज़रुल हसन, जीएनएम पूजा जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ सुसंगत कानूनी धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। प्रसूता को उपचार के लिए भेजा गया है और नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है, जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।

ग्रामीण इलाकों में सरकारी अस्पतालों की आशा बहुओं और अवैध निजी क्लीनिकों का यह नेक्सस (गठजोड़) लगातार नवजातों और प्रसूताओं की जान का दुश्मन बना हुआ है। स्थानीय जनता ने मांग की है कि इस तथाकथित अस्पताल को तुरंत सील कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए जो ऐसे मौत के अड्डों को संरक्षण देते हैं।

 

Voice Of News 24

This error message is only visible to WordPress admins

Error: No feed found with the ID 1.

Go to the All Feeds page and select an ID from an existing feed.