बलिया: भव्य संकल्प के साथ मनाया जाएगा भगवान परशुराम जन्मोत्सव, भृगु कॉरिडोर में मंदिर निर्माण हेतु समिति ने किया 1.51 लाख के सहयोग का ऐलान

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बलिया जनपद में 19 अप्रैल को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव एक नए और ऐतिहासिक संकल्प के साथ मनाया जाएगा।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलिया जनपद में 19 अप्रैल को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव एक नए और ऐतिहासिक संकल्प के साथ मनाया जाएगा। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गंगा बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ इस वर्ष पूरे जनपद में करीब 2500 स्थानों पर जयंती मनाने की तैयारी है। इस भव्य आयोजन के बीच भृगु कॉरिडोर में भगवान परशुराम के मंदिर निर्माण की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है।

हाशिए से मुख्यधारा तक का 12 वर्षों का सफर

समिति के सदस्य सौरभ पाठक ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व जब समिति का गठन हुआ था तब भगवान परशुराम जी की तस्वीर तक सुलभ नहीं थी। लेकिन आज समिति के प्रयासों से पूरे जनपद में जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समिति पूरी तरह से सर्वदलीय और सामाजिक है, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्राह्मण एकता और समाज के गरीब वर्गों की सहायता करना है।

मंदिर निर्माण हेतु वित्तीय सहयोग की घोषणा

मंदिर निर्माण की चर्चाओं के बीच चंदन ओझा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि भृगु कॉरिडोर में मंदिर निर्माण के दौरान किसी भी प्रकार की आर्थिक अड़चन आती है, तो ‘परशुराम सेवा समिति’ की ओर से ₹1,51,000 (एक लाख इक्यावन हजार रुपये) की सहयोग राशि दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार को किसी सीमित दायरे में नहीं बांधा जा सकता, यह कार्यक्रम सर्व समाज के लिए है।

सेवा का केंद्र बनेगा प्रस्तावित मंदिर

जय परशुराम सेवा समिति के रूपेश चौबे ने मंदिर निर्माण के अपने विजन को साझा करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता एक ऐसे मंदिर की है जो सामाजिक उपयोग में आ सके।

उद्देश्य: मंदिर ऐसा हो जहाँ समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग अपने धार्मिक और मांगलिक कार्य निःशुल्क या सुलभता से आयोजित कर सकें।

संकल्प: मंदिर निर्माण की नींव रखने के दिन 151 लीटर गंगाजल और दूध से अभिषेक किया जाएगा।

एकता और सामाजिक सेवा का आह्वान

आयोजकों ने 19 अप्रैल को कलेक्ट्रेट परिसर में होने वाले मुख्य कार्यक्रम में जनपदवासियों से बढ़-चढ़कर शिरकत करने की अपील की है। समिति ने इसे महज एक जयंती नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा और एकता के संकल्प के रूप में पेश किया है। अब देखना यह होगा कि समिति के इस आर्थिक सहयोग और मंदिर निर्माण की मांग पर प्रशासन का क्या रुख रहता है।

 

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