लखीमपुर खीरी: निघासन वार्ड नंबर 4 में बिजली संकट से हाहाकार, शहरी बिल देकर भी ग्रामीण आपूर्ति झेल रहे उपभोक्ता

लखीमपुर खीरी

लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों की मनमानी और ‘कामचोरी’ थमने का नाम नहीं ले रही है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारियों की मनमानी और ‘कामचोरी’ थमने का नाम नहीं ले रही है। ताज़ा मामला निघासन तहसील के नगर पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 4 (मोहल्ला गांधीनगर) का है, जहाँ बिजली की बदहाल व्यवस्था ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है।

शहरी दर पर भुगतान, ग्रामीण क्षेत्र से आपूर्ति

मोहल्ला गांधीनगर के निवासी इब्राहिम खान और शमशेर अली सहित दर्जनों उपभोक्ताओं ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि वे शहरी क्षेत्र में रहते हैं और बिजली का बिल भी शहरी दर (Urban Rate) पर चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें बिजली का कनेक्शन ग्रामीण फीडर से दिया गया है। इसके चलते उन्हें शहरी क्षेत्र के मुकाबले बहुत कम बिजली मिल रही है, जिससे भीषण गर्मी में लोगों का बुरा हाल है।

अधिकारियों की अनदेखी से आक्रोश

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ और उपजिलाधिकारी (SDM) निघासन के समक्ष कई बार प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर पंचायत का दर्जा होने के बावजूद अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को लगातार अनदेखा कर रहा है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

योगी सरकार के सख्त आदेशों के बाद भी अधिकारी अपनी कार्यशैली में सुधार क्यों नहीं ला रहे?

शहरी बिल वसूलने के बावजूद उपभोक्ताओं को ग्रामीण फीडर से जोड़ना क्या सीधे तौर पर ‘गरीबों की जेब पर डाका’ नहीं है?

क्या सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने और खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटेगी?

स्थानीय जनता ने अब प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उपभोक्ताओं की मांग है कि उन्हें तत्काल शहरी फीडर से जोड़ा जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान करता है या गरीब आदमी इसी तरह व्यवस्था की मार झेलता रहेगा।

 

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