बैजनाथपुर उर्फ़ चरका में 2 करोड़ की जल जीवन मिशन योजना बनी शोपीस, 2 साल बाद भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

महराजगंज

बैजनाथपुर उर्फ़ चरका केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में हर घर तक स्वच्छ और शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘जल जीवन मिशन’ योजना जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बैजनाथपुर उर्फ़ चरका केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में हर घर तक स्वच्छ और शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘जल जीवन मिशन’ योजना जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थानीय गांव बैजनाथपुर उर्फ़ चरका में करीब 2 करोड़ रुपये (200 लाख रुपये) की भारी-भरकम लागत से तैयार की गई यह परियोजना सरकारी दावों और भ्रष्टाचार के सवालों के घेरे में है। विभागीय अभिलेखों में इस परियोजना को वर्ष 2024 में ही पूरी तरह ‘पूर्ण’ दर्शा दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि वर्ष 2026 में भी ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।

कागजों में चमचमाती योजना, धरातल पर सूखा

विभागीय आंकड़ों और सरकारी बोर्ड के अनुसार, इस पेयजल योजना का निर्माण कार्य 12 जनवरी 2023 को शुरू किया गया था और 11 जुलाई 2024 को इसे पूरी तरह मुकम्मल दिखाकर बंद कर दिया गया। सरकारी फाइलों में दावा किया गया है कि इस परियोजना के चालू होने से क्षेत्र के दो गांवों के 2700 से अधिक लोगों को नियमित रूप से शुद्ध पानी मिलेगा। यहाँ तक कि जलापूर्ति का समय भी निर्धारित कर दिया गया है, जिसके तहत सुबह 6:30 बजे से 8:30 बजे तक और शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक पानी की सप्लाई दी जानी है।

अधूरी पाइपलाइन और अधूरे निर्माण की खुली पोल

विभागीय दावों के उलट जब जमीनी हकीकत देखी गई तो हालात बेहद चौंकाने वाले मिले। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि आज तक गांव के एक भी घर में इस योजना के जरिए पानी की सप्लाई नहीं पहुंची है। योजना स्थल पर दिखावे के लिए बड़े-बड़े सोलर पैनल तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन पानी की मुख्य टंकी का निर्माण आज भी अधूरा लटका हुआ है। इसके अलावा, गांव की गलियों में मुख्य पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी आधा-अधूरा छोड़कर ठेकेदार और संबंधित एजेंसी गायब हो चुके हैं।

करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बाद भी यह महत्वाकांक्षी योजना सिर्फ एक सरकारी सफेद हाथी और साइनबोर्ड तक सिमट कर रह गई है। दो साल पहले कागजों में ‘पास’ हो चुकी यह योजना ग्रामीणों की प्यास बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है, जिससे स्थानीय जनता में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

अधूरे काम पर भुगतान? उठ रहे गंभीर सवाल

इस बड़ी लापरवाही के सामने आने के बाद अब सीधे तौर पर संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

जब धरातल पर पानी की टंकी और पाइपलाइन का काम आज भी अधूरा है, तो किस आधार पर योजना को पूर्ण घोषित किया गया?

क्या बिना भौतिक सत्यापन किए ही ठेकेदार को करोड़ों रुपये का पूरा भुगतान कर दिया गया?

जनता के पैसे के इस दुरुपयोग और करोड़ों की धोखाधड़ी के लिए आखिरकार किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी?

ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

पानी की किल्लत से जूझ रहे परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शासन के उच्चाधिकारियों से इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन का बंदरबांट करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और अधूरी पड़ी पाइपलाइन व टंकी को तत्काल दुरुस्त कराकर गांव में पेयजल की आपूर्ति शुरू कराई जाए। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया जिम्मेदार महकमा बैजनाथपुर उर्फ़ चरका की इस बदहाल योजना पर कब जागता है और ग्रामीणों को उनके हक का पानी कब नसीब होता है।

 

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