महराजगंज: आग, आंधी और अब बेमौसम बारिश का कहर; कुदरत की तिहरी मार से अन्नदाता बेहाल

महराजगंज

महराजगंज जनपद के किसानों के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। पहले खेतों में लगी आग का तांडव, फिर प्रचंड आंधी और अब बेमौसम हो रही बारिश ने महाराजगंज के किसानों की कमर तोड़ दी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के किसानों के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। पहले खेतों में लगी आग का तांडव, फिर प्रचंड आंधी और अब बेमौसम हो रही बारिश ने महाराजगंज के किसानों की कमर तोड़ दी है। कुदरत के इस ‘ट्रिपल अटैक’ ने न केवल फसलों को बर्बाद किया है, बल्कि हजारों परिवारों के सुनहरे सपनों को भी चकनाचूर कर दिया है।

आग और आंधी ने पहले ही मचाई थी तबाही

बीते कुछ दिनों में जनपद के विभिन्न हिस्सों में आग ने जमकर तांडव मचाया। देखते ही देखते किसानों की कई एकड़ खड़ी फसलें राख के ढेर में तब्दील हो गईं। अभी किसान इस सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि प्रचंड आंधी ने दस्तक दे दी। आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई गरीबों के आशियाने उजड़ गए, बिजली के खंभे और पेड़ धराशायी हो गए, जिससे पूरे जिले का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

रही-सही कसर बारिश ने की पूरी

जब फसल कटाई का समय नजदीक आया और किसानों की उम्मीदें परवान चढ़ रही थीं, तभी बेसमय हो रही बारिश ने रही-सही कसर पूरी कर दी। खेतों में तैयार खड़ी गेहूं और अन्य फसलें अब पानी और नमी की भेंट चढ़ रही हैं। किसान अपनी आँखों के सामने अपनी मेहनत को मिट्टी में मिलते देख बेबस है।

किसानों का छलका दर्द: सपने हुए मिट्टी में मिल गए

एक किसान जब खेत में बीज बोता है, तो वह केवल फसल नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज से मुक्ति के सपने भी बोता है। आज वही अन्नदाता, जो दुनिया का पेट भरता है, खुद के घर की खुशियों के लिए आंसू बहाने पर मजबूर है। किसानों का कहना है कि कुदरत का यह कैसा करिश्मा है कि जब फल पाने का वक्त आया, तो सब कुछ छीन लिया गया।

Voice Of News 24