सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का दशम् दीक्षांत समारोह: महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 37 मेधावियों को नवाजा, छात्राओं ने मारी बाजी

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद के शासन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार, 29 जून को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति महामहिम आनंदीबेन पटेल ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के दशम् दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के शासन द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार, 29 जून को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति महामहिम आनंदीबेन पटेल ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के दशम् दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह में महामहिम ने विश्वविद्यालय के 37 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ महामहिम राज्यपाल, मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय की वनस्पति विज्ञान प्रो. मधुलिका अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी और कुलपति प्रो. कविता शाह द्वारा मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा दीक्षांत समारोह की स्मारिका ‘उत्कर्ष’ एवं मासिक पत्रिका ‘कनेक्ट’ का विमोचन भी किया गया। इसके बाद छात्राओं ने वंदे मातरम और विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया।

गौतम बुद्ध की पावन धरती को किया नमन
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा, “मुझे इस पावन बुद्ध भूमि पर आकर गर्व की अनुभूति हो रही है। इसी धरती से भगवान गौतम बुद्ध ने पूरे विश्व को शांति और करुणा का संदेश दिया था, जो आज भी देश-विदेश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।” उन्होंने स्वर्ण पदक विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा प्राप्त कर अब आपको समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है और अपने माता-पिता व संस्थान का नाम रोशन करना है।

मेडल और डिग्री पाने में बेटियां आगे, नारी शक्ति की सराहना

राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज लड़कों की अपेक्षा लड़कियों ने अधिक मेडल हासिल किए हैं, और डिग्री प्राप्त करने में भी छात्राएं आगे रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि नारी आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह के पूर्ण होने के साथ ही युवाओं के जीवन में राष्ट्र सेवा का एक नया अध्याय शुरू होता है। यह उपाधि केवल एक प्रमाण-पत्र नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र के उत्थान, विकास और नवोन्मेष (नवाचार) के लिए कार्य करना है। आप सभी विकसित भारत के निर्माण स्तंभ हैं।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और वर्ष 2047 के संकल्प पर दिया जोर

महामहिम ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज तीव्र विकास का युग है, जिसके कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जल संचयन वॉटर हार्वेस्टिंग पर ध्यान देने की अपील की ताकि आने वाले समय में जल संकट से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि हमारा देश आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की ओर बढ़ रहा है। केंद्र व राज्य सरकार की जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने 140 करोड़ देशवासियों के जीवन को सुगम बनाया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में अपना सक्रिय योगदान दें।

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