सरयू के घटते जलस्तर के साथ कटान का कहर: सरहरा में 15 मीटर उपजाऊ भूमि नदी में विलीन, धरोहरों पर मंडराया खतरा

मऊ

नईबाजार/दोहरीघाट मऊ/आजमगढ़ सीमा सरयू घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन जलस्तर में आ रही कमी के साथ ही नदी की तेज लहरों ने तटवर्ती इलाकों में भीषण कटान शुरू कर दिया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

नईबाजार/दोहरीघाट मऊ/आजमगढ़ सीमा सरयू घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन जलस्तर में आ रही कमी के साथ ही नदी की तेज लहरों ने तटवर्ती इलाकों में भीषण कटान शुरू कर दिया है। जलस्तर घटने से जहां निचले इलाकों ने राहत की सांस ली है, वहीं कटान की वजह से तटीय क्षेत्रों और किसानों के बीच हड़कंप मच गया है।

24 घंटे में 15 मीटर उपजाऊ जमीन नदी में समाई

नईबाजार के सरहरा पूरवे के सामने बीते 24 घंटे के भीतर लगभग 15 मीटर उपजाऊ कृषि भूमि कटकर नदी में विलीन हो गई। अब तक सरयू नदी यहां एक जरीब से अधिक कृषि योग्य भूमि को निगल चुकी है। इसके अलावा परमहंस बाबा कुटी के आसपास भी रुक-रुककर कटान जारी है।

बाढ़ खंड आजमगढ़ की लापरवाही पर ग्रामीणों में आक्रोश

किसानों का आरोप है कि सरहरा क्षेत्र में लगातार हो रहे भीषण कटान के बावजूद बाढ़ खंड आजमगढ़ का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके पर मुआयना करने नहीं पहुंचा है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण स्थानीय लोगों और किसानों में गहरा रोष व्याप्त है।

दोहरीघाट की ऐतिहासिक धरोहरों पर बढ़ा खतरा

दोहरीघाट कस्बे में भारत माता मंदिर और शवदाह स्थल के पास नदी की बैकरोलिंग (उल्टी लहरें) तेज होने से बोल्डरों के खिसकने की आशंका बढ़ गई है। नदी के इस भीषण दबाव से मुक्तिधाम, शाही मस्जिद, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, खाकी बाबा की कुटी, रामघाट और जानकी घाट जैसी ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरी हो गई है।

मऊ सिंचाई विभाग ने बढ़ाई निगरानी, बचाव कार्य जारी

दूसरी ओर, सिंचाई विभाग मऊ ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए धनौली रामपुर से लेकर रामघाट तक निगरानी बढ़ा दी है। सिंचाई विभाग के अनुसार:

जलस्तर में गिरावट: गुरुवार को गौरीशंकर घाट पर जलस्तर 69.70 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार शाम 4 बजे घटकर 69.60 मीटर पर आ गया। यह खतरा बिंदु (69.90 मीटर) से 30 सेंटीमीटर नीचे है।

बचाव कार्य: सिंचाई विभाग के अवर अभियंता प्रिंस कुमार ने बताया कि खाकी बाबा की कुटी के समीप हो रहे कटान पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। नदी की तलहटी में ईंट के टुकड़ों से भरी बोरियों के साथ-साथ ऊपर से ‘जियो बैग’ डाले जा रहे हैं, ताकि कटान को पूरी तरह रोका जा सके।

प्रशासन का दावा है कि जलस्तर में और गिरावट आएगी और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्थानीय निवासी नदी के कटान के रुख को देखते हुए बेहद भयभीत हैं।

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