औरैया: बिधूना के सोहनी और रूपपुर सहार उपकेंद्रों पर रात भर अघोषित कटौती, उपभोक्ताओं में आक्रोश, किसान यूनियन ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

औरैया

जनपद औरैया की बिधूना तहसील अंतर्गत आने वाले सोहनी विद्युत उपकेंद्र और रूपपुर सहार विद्युत उपकेंद्र के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अघोषित कटौती ने विकराल रूप ले लिया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

जनपद औरैया की बिधूना तहसील अंतर्गत आने वाले सोहनी विद्युत उपकेंद्र और रूपपुर सहार विद्युत उपकेंद्र के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अघोषित कटौती ने विकराल रूप ले लिया है। क्षेत्र में शाम ढलते ही शुरू होने वाली बिजली की आंख-मिचौली पूरी रात जारी रहती है। इस भीषण कटौती और उमस भरी गर्मी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के आम उपभोक्ताओं में बिजली विभाग के रवैये और सरकार के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।

“पूरी रात चलती है बिजली की नौटंकी”, मुख्यमंत्री के आदेश बेअसर

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी तय शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के आलाधिकारियों और स्थानीय अभियंताओं पर इन आदेशों का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

सोहनी उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों उपभोक्ताओं, जिनमें अमोल कठेरिया, रामकेश कठेरिया, छेदीलाल गुप्ता, रामनारायण गुप्ता, रामशंकर शंखवार, रामकुमार शंखवार (प्रधान, बराहार पंचायत), जयवीर सिंह (पूर्व प्रधान), वीरेंद्र शास्त्री (पूर्व प्रधान), सत्येंद्र डॉक्टर, शिवकुमार प्रजापति, कमलेश शर्मा एडवोकेट और राजेश शर्मा एडवोकेट शामिल हैं, ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा

“दिनभर हम लोग खेतों और अपने-अपने कामों में व्यस्त रहते हैं। उम्मीद होती है कि शाम को घर लौटकर आराम करेंगे, लेकिन शाम सात बजते ही बत्ती गुल हो जाती है। पूरी रात बिजली की नौटंकी चलती रहती है। उमस और मच्छरों के कारण रात भर सो नहीं पाने से अगले दिन काम करना दूभर हो गया है।”

भाकियू (टिकैत) की दो टूक: समस्या हल न हुई तो मुख्यमंत्री आवास पर होगा आमरण अनशन

मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के औरैया जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर अवधेश कुमार सिंह ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तीखे लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक सप्ताह के भीतर ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय की जा रही अघोषित बिजली कटौती को पूरी तरह बंद नहीं किया गया, तो क्षेत्र के हजारों किसान लखनऊ कूच करेंगे। किसान अपनी इस बुनियादी मांग को लेकर मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के आवास के बाहर आमरण अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे।

चुनावों पर असर पड़ने की चेतावनी, जनप्रतिनिधियों पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों और किसान नेताओं का आरोप है कि बिजली विभाग के कुछ आलाधिकारी जानबूझकर सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को परेशान कर व्यवस्था के प्रति नाराजगी पैदा की जा रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र के भाजपा जनप्रतिनिधियों पर भी जनता की इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन रहने और आंखें मूंदने का आरोप लगाया गया है।

उपभोक्ताओं ने चेताया है कि यदि जनहित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की, तो इसका सीधा और साफ असर आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है।

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