चोरों के हौसले बुलंद: फरेंदा में दिनदहाड़े सेंट्रल बैंक के सामने से बाइक पार, 3 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

महराजगंज

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के फरेंदा कस्बे में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब उन्हें खाकी का कोई खौफ नहीं रह गया है। व्यस्ततम इलाके में स्थित सेंट्रल बैंक के ठीक सामने से दिनदहाड़े एक बाइक चोरी हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस के हाथ खाली हैं, जिससे पीड़ित परिवार समेत स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।

बैंक में पैसा निकालने गया था युवक, बाहर आते ही उड़े होश

मिली जानकारी के अनुसार, घटना बीते सोमवार (13 जुलाई 2026) दोपहर करीब 2:00 बजे की है। गोरखपुर जनपद के थाना कैंपियरगंज अंतर्गत ग्राम बसंतपुर (टोला धनहिया) निवासी अंकुश साहनी पुत्र रामू साहनी किसी काम से फरेंदा आए थे। वह पैसा निकालने के लिए फरेंदा स्थित सेंट्रल बैंक पहुंचे।

पीड़ित अंकुश ने अपनी बाइक (संख्या: UP 53 EM 0439) को सेंट्रल बैंक के ठीक सामने बकायदा लॉक करके खड़ा किया और बैंक के अंदर चले गए। लेकिन जब वह कुछ देर बाद पैसे निकालकर बाहर आए, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई— उनकी बाइक वहां से नदारद थी। पीड़ित ने आस-पास काफी खोजबीन की, लेकिन मोटरसाइकिल का कहीं कोई पता नहीं चला।

तहरीर के 3 दिन बाद भी पुलिस ‘मौन’, कार्रवाई सिफर

पीड़ित अंकुश साहनी ने घटना के तुरंत बाद फरेंदा थाने पहुंचकर लिखित तहरीर दी और न्याय की गुहार लगाई। लेकिन पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल तब खड़े हो गए जब तीन दिन बीतने के बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। पीड़ित का गंभीर आरोप है कि।

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद भी अब तक कोई सक्रियता नहीं दिखाई है।

घटनास्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की ज़हमत तक नहीं उठाई गई।

पुलिस की इस सुस्ती के कारण चोरों को भागने और गाड़ी को ठिकाने लगाने का पूरा मौका मिल रहा है।

“दिनदहाड़े बैंक जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थान से गाड़ी चोरी हो जाना फरेंदा क्षेत्र की कानून व्यवस्था की पोल खोलता है। अगर पुलिस समय रहते चेत जाती, तो शायद मेरी बाइक मिल जाती।”

अंकुश साहनी, पीड़ित

जनता में डर का माहौल, अधिकारियों से लगाई गुहार

फरेंदा और आस-पास के इलाकों में लगातार हो रही वाहन चोरी की वारदातों से स्थानीय व्यापारियों और आम जनता में भय और नाराजगी का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर दिनदहाड़े बैंकों के सामने से गाड़ियां गायब होंगी, तो आम आदमी खुद को कहां सुरक्षित महसूस करेगा?

पीड़ित ने अब पुलिस के उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाते हुए मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और बाइक बरामद कराने की मांग की है। इस पूरे मामले पर जब हमारे प्रतिनिधि ने थाना अध्यक्ष से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद फरेंदा पुलिस कुंभकर्णी नींद से जागती है या पीड़ित को अपनी बाइक से हमेशा के लिए हाथ धोना पड़ेगा।

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