धौरहरा
लखीमपुर खीरी जनपद के ब्लॉक रमियाबेहड़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा अकठी में राशन वितरण की धांधली और भ्रष्टाचार का एक बेहद संवेदनशील मामला गरमाता नजर आ रहा है।

लखीमपुर खीरी जनपद के ब्लॉक रमियाबेहड़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा अकठी में राशन वितरण की धांधली और भ्रष्टाचार का एक बेहद संवेदनशील मामला गरमाता नजर आ रहा है। ग्राम सभा अकठी के कोटेदार परिक्रमा प्रसाद एक बार फिर गंभीर विवादों और आरोपों के घेरे में हैं। वायरल हो रही अपुष्ट जानकारियों के अनुसार, कोटेदार पर राशन वितरण में अनियमितता की खबर को दबाने के लिए एक पत्रकार को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत देने की पेशकश का संगीन आरोप लगा है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में पत्रकार को ही मोहरा बनाकर फंसाने की एक गहरी साजिश की भी आशंका जताई जा रही है।
कथित फोन वार्तालाप से खुला मामला, रिश्वत की पेशकश का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरा मामला ग्राम सभा में राशन वितरण से जुड़ी लगातार आ रही अनियमितताओं और घटतौली की शिकायतों से शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि जब इस भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरें मीडिया में आने लगीं, तो कोटेदार द्वारा मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। पत्रकार और कोटेदार के बीच फोन पर हुई कथित वार्तालाप के आधार पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि कोटेदार ने खबरों का प्रकाशन रोकने के एवज में 50 हजार रुपये देने का दांव खेला।
पत्रकार को फंसाने की साजिश या ध्यान भटकाने का पैंतरा?
इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया जब क्षेत्र के कुछ जागरूक लोगों और सूत्रों ने इस पर साजिश की आशंका व्यक्त की। कुछ स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि राशन वितरण के मुख्य और असली मुद्दे से अधिकारियों और जनता का ध्यान भटकाने के लिए सुनियोजित तरीके से पत्रकार को ही इस मामले में घसीटने और फंसाने की कोशिश की जा रही है, ताकि कोटेदार के खिलाफ चल रही जांच कमजोर पड़ सके।
अधिकारियों की चुप्पी और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों और कथित फोन वार्तालाप की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस पूरे हाईप्रोफाइल मामले पर संबंधित आपूर्ति विभाग और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से भी अभी तक कोई स्पष्ट या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे संशय की स्थिति बरकरार है।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग
अकठी ग्राम सभा के कार्डधारकों और ग्रामीणों का कहना है कि कोटेदार के रवैये और राशन वितरण प्रणाली से वे लंबे समय से परेशान हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उपजिलाधिकारी (SDM) धौरहरा से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे प्रकरण (राशन धांधली, रिश्वत की पेशकश और साजिश की आशंका) की किसी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए। दूध का दूध और पानी का पानी होने से ही सच्चाई सामने आ सकेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सकेगी।
अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि लखीमपुर खीरी का जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या कोटेदार के खिलाफ लगे इन संगीन आरोपों की निष्पक्ष जांच समय रहते हो पाती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 13, 2026













