हापुड़: लगातार बारिश बरपा रही कहर; पिलखुवा में मकान की छत गिरने से अधेड़ की मौत, बेटा गंभीर रूप से घायल,सद्दीकपुरा मोहल्ले में तड़के हुआ बड़ा हादसा

पिलखुवा

हापुड़ जनपद में पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार और लगातार बारिश अब आम जनमानस के लिए जानलेवा साबित होने लगी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

हापुड़ जनपद में पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार और लगातार बारिश अब आम जनमानस के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सद्दीकपुरा में गुरुवार तड़के एक जर्जर और पुराने मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में मलबे के नीचे दबने से परिवार के मुखिया (52 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई और पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया।

नींद में ही मलबे में दबे पिता-पुत्र

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सद्दीकपुरा निवासी अशफाक (उम्र 52 वर्ष) का परिवार एक पुराने मकान में रहता था। लगातार हो रही बारिश के कारण मकान की छत और दीवारों में पानी रिसने से नमी काफी बढ़ गई थी। गुरुवार सुबह जब परिवार के लोग सो रहे थे, तभी अचानक तेज आवाज के साथ कच्चे-पुराने मकान की छत भरभराकर ढह गई।

मलबे के गिरते ही चीख-पुकार मच गई, जिसे सुनकर आसपास के स्थानीय लोग तुरंत घटना स्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों और पड़ोसियों ने भारी मशक्कत के बाद मलबे को हटाकर नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक अशफाक की सांसें थम चुकी थीं। वहीं, उनका 17 वर्षीय बेटा कासिम मलबे में दबने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया।

गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, मुआवजे की मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक अशफाक का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। घर की माली हालत ठीक न होने के कारण उनके दोनों बेटे, 17 वर्षीय कासिम और 18 वर्षीय नाजिम मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में परिवार के कमाऊ मुखिया की अचानक मौत हो जाने से घर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मोहल्ले के संभ्रांत नागरिकों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल उचित सरकारी आर्थिक सहायता (मुआवजा) दिए जाने की पुरजोर मांग की है।

बारिश में जर्जर मकान बन रहे हैं ‘टाइम बम’: विशेषज्ञ
भवन निर्माण विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश होने पर पुराने, कच्चे और जर्जर मकानों की दीवारों व छतों में पानी समा जाता है। इससे ईंट, गारे और सीमेंट की पकड़ बेहद कमजोर पड़ जाती है। यदि समय रहते ऐसे कमजोर ढांचों की मरम्मत न कराई जाए, तो वे कभी भी अचानक ढह सकते हैं।

प्रशासन ने भी आमजन से अपील की है कि बरसात के इस मौसम में जर्जर मकानों, कमजोर दीवारों, बिजली के खंभों और जलभराव वाले स्थानों से दूरी बनाकर रखें। विशेष रूप से कमजोर भवनों में रह रहे लोग एहतियात बरतें ताकि ऐसे जानलेवा हादसों से बचा जा सके।

 

Voice Of News 24

 

 

 

 

 

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