बलिया: जिला अस्पताल में 40 मिनट तक नहीं मिले डॉक्टर, सड़क हादसे में घायल युवक की तड़प-तड़प कर मौत; परिजनों का हंगामा, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश

बलिया

बलिया जनपद से स्वास्थ्य सिस्टम को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाली खबर सामने आई है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलिया जनपद से स्वास्थ्य सिस्टम को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और आक्रोशित करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ फेफना थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 40 वर्षीय युवक को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी में करीब 40 मिनट तक कोई भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुआ। उचित समय पर इलाज न मिलने के कारण घायल युवक ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। युवक की मौत से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने जिला अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा काटा। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से हुआ था हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फेफना थाना क्षेत्र के खोरी पाकड़ (मूल निवासी) और हाल पता माल्देपुर गांव निवासी अविनाश सिंह (40 वर्ष) गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद बदहवास परिजन उन्हें तुरंत एंबुलेंस और निजी साधन की मदद से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।

भाई का आरोप 40 मिनट तक तड़पता रहा भाई, नहीं आया कोई डॉक्टर

मृतक अविनाश सिंह के छोटे भाई आलोक कुमार ने रोते हुए मीडिया को बताया, “दुर्घटना के बाद जब हम भाई को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, तो वहां आपातकालीन वार्ड में कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था। मेरे भाई अस्पताल परिसर में करीब 40 मिनट तक जीवित रहे और तड़पते रहे, लेकिन किसी ने उन्हें हाथ तक नहीं लगाया। इसके बाद जब हमारे चिकित्सक चाचा अस्पताल पहुंचे और उन्होंने भाई का टेस्ट किया, तब पता चला कि अविनाश की मौत हो चुकी है। मेरे भाई की जान सिर्फ और सिर्फ डॉक्टरों की लापरवाही और अस्पताल में उनकी अनुपस्थिति के कारण गई है।”

इस घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही फेफना थाना प्रभारी अखिलेश पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

इस दर्दनाक घटना के बाद जिला अस्पताल पहुंचे कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने सूबे की सरकार और लचर स्वास्थ्य प्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बलिया के जिला अस्पताल की स्थिति वेंटिलेटर पर है, जहां गंभीर रूप से घायल मरीजों को भी समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

जांच कमेटी गठित, दोषियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई: सीएमओ/सीएमएस

पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभय नारायण राय ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यह घटना बेहद दुखद और संवेदनशील है। परिजनों का आरोप है कि मरीज को लाने के बाद ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था। यदि यह आरोप सही है, तो यह व्यवस्था की भारी कमी और घोर लापरवाही है। इसमें जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को संबंधित डॉक्टरों को तत्काल आरोप पत्र जारी करने और स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस. के. यादव ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिस समय घायल युवक को अस्पताल लाया गया था, उस समय कागजों पर ट्रॉमा सेंटर में डॉ. मनोज कुमार और इमरजेंसी में डॉ. संतोष की ड्यूटी निर्धारित थी। जांच में यदि ये डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध बर्खास्तगी समेत कठोरतम विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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