बुलंदशहर
बुलंदशहर जनपद में कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदशहर के परिसर में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद में कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदशहर के परिसर में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र दिलेर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीराज सिंह मंच पर मौजूद रहे। कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान जिले भर से आए सैकड़ों प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के आला अधिकारियों ने भाग लिया।
केमिकल फार्मिंग से बंजर हो रही जमीन, प्राकृतिक तरीके ही विकल्प: वैज्ञानिकों की चेतावनी
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों ने उपस्थित किसानों को रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि अंधाधुंध केमिकल के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है और जमीन बंजर हो रही है, बल्कि हमारा खान-पान भी जहरीला हो रहा है। वैज्ञानिकों ने प्रजेंटेशन के माध्यम से किसानों को बेहद कम लागत में तैयार होने वाले प्राकृतिक खाद और कीट नियंत्रकों के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी दी।
विधायक लक्ष्मीराज सिंह ने गिनाए प्राकृतिक खेती के 3 मुख्य सूत्र
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विधायक लक्ष्मीराज सिंह ने प्राकृतिक खेती को आज के समय की सबसे बड़ी अनिवार्यता बताया। उन्होंने कहा, रासायनिक खेती के कारण किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है। प्राकृतिक खेती एक ऐसी प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति है, जो कम लागत में किसानों को ज्यादा मुनाफा दे सकती है।
विधायक ने किसानों के सम्मुख मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:
खेती को जहर मुक्त बनाना: गोबर, गौमूत्र, जीवामृत, और बीजामृत जैसे पूर्णतः देसी व घरेलू तरीकों को अपनाकर फसलों को कीटनाशकों से मुक्त करना।
किसानों की आय में रिकॉर्ड वृद्धि: जब खेती की लागत शून्य या न्यूनतम हो जाएगी और बाजार में जैविक व प्राकृतिक उत्पादों के अच्छे दाम मिलेंगे, तो किसानों की आय स्वतः दोगुनी हो जाएगी।
टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि: इस पद्धति से न केवल पर्यावरण का संतुलन सुधरेगा, बल्कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उपजाऊ और सेहतमंद जमीन छोड़कर जाएंगे।
सरकार देगी प्रशिक्षण और आर्थिक मदद: प्रभारी मंत्री सुरेंद्र दिलेर
मुख्य अतिथि और जिले के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र दिलेर ने अन्नदाताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश और प्रदेश की सरकार प्राकृतिक खेती को एक बड़े जन-आंदोलन के रूप में विकसित कर रही है। सरकार द्वारा इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए हर स्तर पर किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण और आवश्यक आर्थिक सहायता दोनों मुहैया कराई जा रही हैं। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद सभी प्रगतिशील किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे शुरुआती दौर में कम से कम अपनी कुल कृषि भूमि के एक छोटे से हिस्से (एक या दो बीघे) में प्राकृतिक खेती की शुरुआत अवश्य करें और परिणाम देखने के बाद इसका दायरा बढ़ाएं।
कार्यक्रम के समापन सत्र में विधायक लक्ष्मीराज सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनाने की दिशा में प्राकृतिक खेती मील का पत्थर साबित होगी। इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए हर गांव में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) June 19, 2026












