पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पीजी शोध मूल्यांकन की नई व्यवस्था: शोध पत्र प्रकाशन पर मिलेंगे 25 अतिरिक्त अंक

जौनपुर

जौनपुर जनपद के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति NEP 2020 के तहत स्नातकोत्तर पीजी पाठ्यक्रमों की शोध परियोजनाओं के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव किया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर जनपद के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति NEP 2020 के तहत स्नातकोत्तर पीजी पाठ्यक्रमों की शोध परियोजनाओं के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव किया है। विश्वविद्यालय ने शोध की गुणवत्ता बढ़ाने और विद्यार्थियों को अकादमिक प्रकाशन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की है।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, पीजी प्रथम और द्वितीय वर्ष की मुख्य शोध परियोजनाओं का कुल मूल्यांकन अधिकतम 100 अंकों का होगा। इस नई व्यवस्था की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

अतिरिक्त अंकों का प्रावधान: यदि कोई विद्यार्थी अपने शोध कार्य को यूजीसी-केयर UGC-CARE या पीयर रिव्यू जर्नल में प्रकाशित कराता है, तो उसे मूल्यांकन में 25 अंक तक का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, कुल प्राप्तांक 100 अंकों से अधिक नहीं होंगे।

पारदर्शी मूल्यांकन मंडल: शोध परियोजनाओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालय द्वारा नामित एक परीक्षक मंडल करेगा। इस मंडल में शोध पर्यवेक्षक (गाइड) के साथ एक बाह्य (एक्सटर्नल) परीक्षक भी शामिल रहेगा, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण बनेगी।

परीक्षकों का पारिश्रमिक: नियुक्त बाह्य परीक्षकों को पीजी स्तर की प्रायोगिक परीक्षाओं के समान ही निर्धारित पारिश्रमिक दिया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संबद्ध महाविद्यालयों और विभागों को इस नई मूल्यांकन प्रणाली का प्रभावी ढंग से अनुपालन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

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