सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जनपद में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट उत्तर प्रदेश के प्रांतीय आह्वान पर बुधवार को सिद्धार्थनगर जनपद में दवा व्यापारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट उत्तर प्रदेश के प्रांतीय आह्वान पर बुधवार को सिद्धार्थनगर जनपद में दवा व्यापारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। ‘दवा विक्रेता समिति सिद्धार्थनगर (DVS)’ के नेतृत्व में कुछ आपातकालीन दुकानों को छोड़कर जिले भर के लगभग सभी मेडिकल स्टोर और दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। इस एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के जरिए केमिस्टों ने कॉरपोरेट घरानों की ऑनलाइन दवा बिक्री नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश दर्ज कराया।
नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं ऑनलाइन कंपनियां: जमील सिद्दीकी
हड़ताल के दौरान दवा विक्रेताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष मोहम्मद जमील सिद्दीकी ने कहा, “बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान के देश में ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री धड़ल्ले से जारी है। ये ई-फार्मेसी कंपनियां फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन बिना किसी वैध चिकित्सकीय परामर्श के दवाओं के वितरण और भारी छूट का खेल खेल रही हैं, जो सीधे तौर पर आम मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है।
कानून में प्रावधान नहीं, फिर भी चल रहा है व्यापार
दवा संघ के पदाधिकारियों ने कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि देश के ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 एवं नियम 1945’ के अंतर्गत ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री का कोई स्पष्ट या वैध प्रावधान मौजूद नहीं है। इसके बावजूद कई बड़ी ऑनलाइन और क्विक कॉमर्स कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर सालों से व्यापार कर रही हैं। इससे देश भर के छोटे, खुदरा और लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने भरण-पोषण और गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कोविड काल की अधिसूचनाओं के दुरुपयोग का आरोप, इन प्रस्तावों को वापस लेने की मांग
ज्ञापन में दवा विक्रेताओं ने तकनीकी और नीतिगत विसंगतियों को उठाते हुए मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें सरकार के सामने रखी हैं:
कोविड महामारी के दौरान सरकार द्वारा अस्थाई रूप से जारी की गई GSR 220(E) और GSR 817(E) जैसी अधिसूचनाओं का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और क्विक कॉमर्स कंपनियां अब अपनी व्यावसायिक भलाई के लिए जमकर दुरुपयोग कर रही हैं, इन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
अवैध वितरण पर रोक: बिना भौतिक रूप से सत्यापित किए गए ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की होम डिलीवरी पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाए।
छोटे केमिस्टों की सुरक्षा
रात-दिन ग्राउंड पर रहकर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने वाले देश के लाखों छोटे केमिस्टों के व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए सरकार ठोस नियमावली बनाए।
दवा नेताओं ने सरकार को याद दिलाया कि कोविड महामारी के भीषण संकट के दौर में भी देश के इन्हीं स्थानीय केमिस्टों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गली-मोहल्लों तक जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखा था, लेकिन आज उन्हें ही हाशिए पर धकेला जा रहा है।
प्रदर्शन में ये पदाधिकारी रहे मुख्य रूप से मौजूद
बुधवार को हुए इस सफल बंद और प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष मोहम्मद जमील सिद्दीकी के साथ जिला महासचिव मनोज कुमार जायसवाल, नगर अध्यक्ष (सिद्धार्थनगर) अनिरुद्ध राय, नगर महासचिव मोज़िबुल्लाह, मुजीब, नगर सचिव मुर्तजा खान, नगर कोषाध्यक्ष अखिलेश यादव और संघ के वरिष्ठ सदस्य अशफाकुल्लाह सहित भारी संख्या में जनपद के दवा विक्रेता और व्यापारी उपस्थित रहे।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) May 20, 2026






















