भ्रष्टाचार का ‘खेला’,लक्ष्मीपुर में गृहिणी को ‘कागजी कर्मचारी’ बना डकारे सरकारी ₹50,000, मुख्यमंत्री तक पहुँची गूँज

महराजगंज

महराजगंज जनपद के लक्ष्मीपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा बैजनाथपुर उर्फ चरका से सरकारी धन की बंदरबांट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के लक्ष्मीपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा बैजनाथपुर उर्फ चरका से सरकारी धन की बंदरबांट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट में सेंधमारी करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और रसूखदारों ने मिलीभगत कर एक घरेलू महिला को सरकारी कर्मचारी दर्शा दिया और हजारों रुपये का चूना लगा दिया।

तीन किस्तों में सरकारी खजाने पर ‘डाका’

स्थानीय निवासी युनुस खान द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान ‘5THSFC’ (राज्य वित्त आयोग) मद से भारी अनियमितता की गई। आरोप है कि हुमैरा खातून नामक एक साधारण गृहिणी के खाते में कुल 50,000 रुपये हस्तांतरित किए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त महिला का किसी भी सरकारी सेवा या पद से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।

डिजिटल साक्ष्यों के साथ जालसाजी का खुलासा

भ्रष्टाचार के इस खेल को बेहद शातिराना तरीके से अंजाम दिया गया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, तीन अलग-अलग वाउचरों के माध्यम से यह अवैध भुगतान किया गया:

वाउचर संख्या 5THSFC/2024-25/P/1

वाउचर संख्या 5THSFC/2024-25/P/7

वाउचर संख्या 5THSFC/2024-25/P/13

यह पूरा लेनदेन 17 अप्रैल 2024 से 20 जनवरी 2025 के बीच किया गया। बिना किसी वास्तविक कार्य के सरकारी धन का यह भुगतान सीधे तौर पर दस्तावेजी जालसाजी और वित्तीय गबन की ओर इशारा कर रहा है।

लखनऊ तक पहुँची भ्रष्टाचार की गूँज

ग्रामीण स्तर पर हो रही इस लूट की शिकायत अब लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुँच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे शिकायत संख्या GOVUP/E/2026/0054133 के तहत दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव पर सीधे आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

आक्रोश में ग्रामीण, सवालों के घेरे में जिम्मेदार

लक्ष्मीपुर ब्लॉक में हुए इस फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक निगरानी और ऑडिट व्यवस्था की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जहाँ एक ओर गांव विकास की राह देख रहा है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार लोग जनता के टैक्स के पैसे को निजी स्वार्थ के लिए लुटा रहे हैं।

यह सीधे तौर पर गरीबों के हक पर डाका है। अगर एक गृहिणी के नाम पर पैसे निकाले जा सकते हैं, तो न जाने ऐसे कितने फर्जी भुगतान फाइलों में दफन होंगे

अब देखना यह होगा कि महराजगंज के आला अधिकारी इस मामले में दोषियों पर नकेल कसते हैं या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी दफ्तरों की धूल फांकती रह जाएगी।

 

 

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