बागपत में चिया सीड्स की सफल पैदावार: 87 किसानों ने ‘काले सोने’ से बदली अपनी तकदीर

बागपत

बागपत जनपद के पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने की चाह अब किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बागपत जनपद के पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने की चाह अब किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। ‘काला सोना’ के नाम से मशहूर चिया सीड्स की पहली फसल बागपत में पूरी तरह तैयार हो चुकी है। खेकड़ा स्थित बागपत नेचुरल फार्म हाउस पर फसल की कटाई के अवसर पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने स्वयं पहुंचकर निरीक्षण किया और इस बदलाव की सराहना की।

पारंपरिक खेती का बेहतर विकल्प

गन्ने जैसी फसलों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण जिले में गिरते भूजल स्तर और मिट्टी की घटती उर्वरकता को देखते हुए प्रशासन ने चिया सीड्स को बढ़ावा दिया है। वर्तमान में जिले के 87 किसान इसकी खेती कर रहे हैं। यह सुपरफूड मात्र तीन महीने में तैयार हो जाता है और इसमें लागत व पानी, दोनों की खपत बेहद कम है।

‘बागपत ब्लूम’ ब्रांड से मिलेगी नई पहचान

बाजार में चिया सीड्स की मांग इसके स्वास्थ्य लाभों के कारण तेजी से बढ़ रही है। इसकी कीमत 300 से 800 रुपये प्रति किलो तक होने के कारण किसानों को बंपर मुनाफे की उम्मीद है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशासन ‘बागपत ब्लूम’ ब्रांड के तहत इन उत्पादों की मार्केटिंग करेगा, ताकि किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे बाजार से जोड़ा जा सके।

प्रशासन द्वारा किसानों को विशेष मार्गदर्शिका और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया गया है। डीएम ने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय को दोगुना करें। यह पहल न केवल बागपत को एक नई पहचान देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगी।

 

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