बलरामपुर: सादुल्ला नगर पुलिस का बड़ा धमाका, लॉजिस्टिक्स के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश

बलरामपुर

बलरामपुर जनपद पुलिस को साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलरामपुर जनपद पुलिस को साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना सादुल्ला नगर पुलिस ने संगठित तरीके से साइबर ठगी करने वाले एक सक्रिय गैंग का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को माल ढुलाई के नाम पर अपना शिकार बनाता था।

पुलिस अधीक्षक विकास कुमार द्वारा जनपद में संचालित साइबर हॉटस्पॉट के विरुद्ध कार्यवाही हेतु दिए गए सख्त निर्देशों के क्रम में यह सफलता मिली। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पाण्डेय व क्षेत्राधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष सत्येन्द्र वर्मा के नेतृत्व वाली टीम ने संकटा चौराहा के पास से घेराबंदी कर इन अभियुक्तों को दबोचा।

देवा तिवारी पुत्र अनूप कुमार तिवारी (निवासी: भगवड़ा देवरिया इनायत, सादुल्ला नगर, बलरामपुर)

दीपक कुमार शुक्ला पुत्र स्व. श्याम मूरत शुक्ला (निवासी: मधुपुर मनकापुर, जनपद गोंडा)

कैसे करते थे ठगी?

पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह गिरोह ग्राहकों को कम दरों पर ट्रांसपोर्टेशन का झांसा देकर आकर्षित करता था।

लोगों का विश्वास जीतने के लिए फर्जी आईडी का इस्तेमाल किया जाता था।

माल ढुलाई के नाम पर एडवांस धनराशि विभिन्न बैंक खातों में मंगवाई जाती थी।

जैसे ही पैसा खाते में आता, गिरोह के सदस्य उसे एटीएम या चेक के माध्यम से निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे, ताकि शिकायत होने पर बैंक खाता होल्ड होने से पहले पैसा सुरक्षित निकाला जा सके।

सिम कार्ड का निपटारा: खाता होल्ड होते ही ये लोग सिम कार्ड निकालकर फेंक देते थे और नए सिम व खातों का इंतजाम कर लेते थे।

हरियाणा से कोलकाता तक फैला नेटवर्क

अभियुक्त दीपक कुमार शुक्ला पूर्व में कोलकाता में रहकर साइबर गिरोह के संपर्क में आया था। उसने ही देवा तिवारी को इस नेटवर्क में शामिल किया। इन अभियुक्तों पर हरियाणा के रेवाड़ी में भी मुकदमे दर्ज हैं और दीपक पहले भी जेल जा चुका है।

पुलिस को अब तक इनके पास से 10 बैंक खाते मिले हैं, जिनसे विभिन्न राज्यों में 11 साइबर शिकायतें जुड़ी हुई हैं। केवल एक खाते के विवरण से 16 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस ने इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एंड्रॉयड मोबाइल और कई कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज बरामद किए हैं।

गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय भेजा जा रहा है।

 

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