अंतिम विदाई या उत्सव? 101 वर्षीय बुजुर्ग की ढोल-नगाड़ों और गुलाल के साथ निकली शवयात्रा

बुलंदशहर

बुलंदशहर जनपद के गांव नैथला हसनपुर में एक ऐसी अंतिम यात्रा देखने को मिली, जिसने शोक के माहौल को उत्सव में बदल दिया। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।


बुलंदशहर जनपद के गांव नैथला हसनपुर में एक ऐसी अंतिम यात्रा देखने को मिली, जिसने शोक के माहौल को उत्सव में बदल दिया। गांव के प्रतिष्ठित बुजुर्ग और ‘पीर वाले’ के नाम से विख्यात शंकर लाल शर्मा का 101 वर्ष की लंबी आयु में निधन हो गया। एक शताब्दी से अधिक का सार्थक जीवन पूर्ण करने के कारण, परिजनों ने उन्हें अश्रुपूरित विदाई देने के बजाय जश्न के साथ विदा करने का निर्णय लिया।

भजनों और फूलों से सजा मार्ग

बाबा शंकर लाल की अंतिम यात्रा किसी शोभायात्रा जैसी नजर आई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों ने जमकर रंग-गुलाल और फूल उड़ाए। पूरे रास्ते “राम नाम सत्य है” के नारों के साथ मधुर भजनों की गूंज बनी रही।

सौभाग्य का प्रतीक

ग्रामीणों का कहना है कि 101 वर्ष की स्वस्थ और लंबी आयु का समापन किसी सौभाग्य से कम नहीं है। इसी गौरवशाली जीवन का सम्मान करने के लिए परिजनों और ग्रामीणों ने नाचते-गाते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी। यह अनूठी शवयात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

 

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