योगी सरकार का बड़ा तोहफा: अब शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों को मिलेगा कैशलेस इलाज, कैबिनेट की मुहर

लखनऊ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। 29 जनवरी 2026 को हुई महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में कैशलेस चिकित्सा योजना को मंजूरी दे दी गई है। अब बीमारी या आपात स्थिति में शिक्षकों को इलाज के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषदों के अधीन आने वाले करीब 15 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके परिवार निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे। यह सुविधा आयुष्मान भारत की तर्ज पर मिलेगी और इस पर सरकार करीब 448 करोड़ रुपये खर्च करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस 2025 पर इसकी घोषणा की थी, जिस पर गुरुवार को कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत आने वाले अनुदानित और स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों, व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों, मानदेय शिक्षकों और उनके आश्रितों को इसका लाभ मिलेगा। संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक भी इसमें शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि इससे 2.97 लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे और इस पर 89.25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

इसी तरह, बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डेन, शिक्षकों, और प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइयों व उनके आश्रितों को भी यह सुविधा मिलेगी। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना से बेसिक शिक्षा परिषद के 11.95 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मी लाभान्वित होंगे। सरकार इस पर प्रति कर्मी करीब 3000 रुपये सालाना प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च अनुमानित कर रही है।

कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मिलेगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के तय मानकों के अनुसार होंगी। स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद ही योजना का लाभ मिल पाएगा। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी। यह भी साफ किया गया है कि जो लोग पहले से किसी अन्य स्वास्थ्य योजना, जैसे प्रधानमंत्री आयुष्मान जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से जुड़े हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

 

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