बुलंदशहर: 34 साल बाद आया फैसला; जहांगीराबाद 1991 विधानसभा चुनाव बलवा मामले में तीन को दोषी करार

जहांगीराबाद

बुलंदशहर जनपद से बड़ी खबर न्याय में देरी भले ही हुई, लेकिन 34 साल बाद अंततः सत्य की जीत हुई है। बुलंदशहर न्यायालय ने वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीराबाद में हुए भीषण बलवा और बूथ कैप्चरिंग के मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

 

बुलंदशहर जनपद से बड़ी खबर न्याय में देरी भले ही हुई, लेकिन 34 साल बाद अंततः सत्य की जीत हुई है। बुलंदशहर न्यायालय ने वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीराबाद में हुए भीषण बलवा और बूथ कैप्चरिंग के मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में तीन आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना मई 1991 के विधानसभा चुनाव की है। तत्कालीन समय में अराजक तत्वों ने जनता इंटर कॉलेज स्थित एक पोलिंग बूथ पर हथियारों के बल पर बूथ कैप्चरिंग की कोशिश की थी। उपद्रवियों ने न केवल मतदान प्रक्रिया में बाधा डाली, बल्कि मतपेटियों को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई थी और प्रशासन को मजबूरन चुनाव स्थगित करना पड़ा था।

40 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी FIR

तत्कालीन पीठासीन अधिकारी श्याम बाबू भटनागर ने इस मामले में करीब 40 लोगों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तीन दशकों से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब ACJ (JD) 9 कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने सुनाई सजा

अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। लक्ष्मी नारायण (निवासी गहना),अलीम उर्फ गुड्डू (निवासी पुराना बाजार)
इरशाद (पुत्र वंशीधर) न्यायालय ने तीनों दोषियों पर 1200-1200 रुपये का अर्थदंड लगाया और न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई है।

चुनावी इतिहास से जुड़ा है यह मामला

मई 1991 में हुए इस चुनाव में नवल किशोर गर्ग, पीके शर्मा, होशियार सिंह और मुकेश पंडित जैसे दिग्गज प्रत्याशी मैदान में थे। बलवे के कारण चुनाव रद्द होने के बाद नवंबर 1991 में दोबारा मतदान कराया गया था, जिसमें भाजपा प्रत्याशी नवल किशोर गर्ग ने जीत दर्ज की थी। इस फैसले के बाद क्षेत्र में एक बार फिर दशकों पुरानी यादें ताजा हो गई हैं।