अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा यू-टर्न: अपने ही आदेश पर लगाई रोक, कहा- “गलत व्याख्या कर खनन को नहीं दिया जा सकता बढ़ावा”

ब्यूरो रिपोर्ट

देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली को बचाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली को बचाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने पिछले महीने अरावली की नई परिभाषा को लेकर दिए गए अपने ही आदेश पर स्टे (रोक) लगा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक एक नई विशेषज्ञ समिति का गठन नहीं हो जाता, तब तक पिछला आदेश स्थगित रहेगा।

क्यों बदला सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला?

दरअसल, नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस योजना को हरी झंडी दी थी जिसमें अरावली की नई परिभाषा तय की गई थी। लेकिन इस आदेश के बाद पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई थी कि:

अवैध खनन का खतरा: नई परिभाषा के कारण अरावली के विशाल और संवेदनशील क्षेत्र कानूनी सुरक्षा के घेरे से बाहर हो सकते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान: हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में खनन माफियाओं को अवैध तरीके से पहाड़ियों को काटने का मौका मिल सकता है।

“आदेश की हो रही है गलत व्याख्या” – CJI

सुनवाई के दौरान जब सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने पिछले महीने की योजना का हवाला दिया, तो सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:

“हमें लगता है कि समिति की रिपोर्ट और अदालत की टिप्पणियों की गलत व्याख्या की जा रही है। किसी भी कार्यान्वयन से पहले एक निष्पक्ष और स्वतंत्र विशेषज्ञ की राय लेना अनिवार्य है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नई परिभाषा कहीं गैर-अरावली क्षेत्रों के दायरे को बढ़ाकर अनियमित खनन की सुविधा तो नहीं दे रही है?”

केंद्र और 4 राज्यों को नोटिस, अगली सुनवाई 21 जनवरी को

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए हैं:

नोटिस जारी: केंद्र सरकार सहित हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

नई कमेटी का गठन: अरावली के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञों का एक नया और तटस्थ पैनल बनाया जाएगा।

अगली तारीख: मामले की विस्तृत सुनवाई अब 21 जनवरी 2026 को तय की गई है।

 

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