सिद्धार्थनगर : मृतक व्यक्ति को कागजात में जिंदा दिखाकर जिम्मेदार कर रहे जालसाजी

Voice of News 24 

05 Aug 2024 00:-7 Am

सिद्धार्थनगर 

जनपद सिद्धार्थनगर क्षेत्र में मनरेगा कार्य के लिए मृतक व्यक्ति की भी दर्ज की जाती है उपस्थिति। जिम्मेदार फर्जी तरीके से भर लेते हैं जेब। खुलासा होने पर सच आया सामने। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जनपद सिद्धार्थनगर में मनरेगा योजना के तहत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां, कई साल पहले मर चुके लोग सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरी कर रहे हैं। एक व्यक्ति, जगमोहन, जिसकी मृत्यु करीब साढ़े तीन साल पहले ही हो चुकी थी, लेकिन वह अभी कागजातों में जिंदा है। उसके नाम पर मनरेगा कार्ड में काम दर्ज किया गया है।

रोजगार सेवक ने उसकी तस्वीर भी सरकारी पोर्टल पर साझा की है तथा 14 दिनों की हाजिरी भी लगाई है। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब जगमोहन के बैंक खाते में हाल ही में मजदूरी का पैसा जमा हुआ। रोजगार सेवक इस पैसे को निकालने के लिए जगमोहन के घर पहुंचा और उसकी बैंक पासबुक मांगी। तों परिवार ने इसे देने से इनकार कर दिया, तब वह उन्हें धमकी देने लगा। परिवार ने जांच-पड़ताल की तो पता चला कि मृतक जगमोहन के नाम पर अभी भी मनरेगा में काम दिखाया जा रहा है। और जिम्मेदारो द्वारा जमकर कालाबाजारी कर जेब भरा जा रहा है।

इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार ने बताया कि डीसी मनरेगा को इस मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच-पड़ताल करने के बाद पुष्टि के आधार पर संबंधित के उपर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

ये सिद्धार्थनगर है साहब, जहां सच्चाई को दबाकर कागजातों में धोखाधड़ी कर जिम्मेदार माला-माल हो जातें हैं।

 

 

अभी विगत कुछ दिनों पहले सिद्धार्थनगर जनपद को महात्मा गांधी मनरेगा योजना के तहत करवाए जा रहे काम को लेकर पूरे यूपी में जमकर सराहना की गई और सिद्धार्थनगर को इस योजना के लिए सबसे सफल जिला मानते हुए बिल्कुल शीर्ष पर स्थान दिया गया था। जिंदों के बजाय मुर्दों से काम करवा रहे थे जिम्मेदार, शायद यही कारण रहा होगा कि यूपी के नंबर वन जिलों में सिद्धार्थनगर जनपद का नाम सुमार हुआ था।
जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के लगातार निरीक्षण के ताबूत तले ही हो रही थी धोखाधड़ी, लेकिन सातिरो ने डीएम को भनक तक भी नहीं होने दिया। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी इस मुद्दे पर कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं? क्योंकि उनके निरीक्षण के दहशत का जो रंग भ्रष्टाचारियों पर चढ़ रहा था, कहीं न कहीं वह रंग अब इस मामले के बाद फीका पड़ता नजर आ रहा है।

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