लखनऊ

उत्तर प्रदेश में अब वाहनों की फिटनेस जांच मानवीय हस्तक्षेप के बजाय अत्याधुनिक मशीनों द्वारा की जाएगी। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश में अब वाहनों की फिटनेस जांच मानवीय हस्तक्षेप के बजाय अत्याधुनिक मशीनों द्वारा की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एटीएस से जुड़ी नई राज्य नीति को हरी झंडी दे दी गई है।
पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जीवाड़े पर लगेगा अंकुश
नई व्यवस्था के तहत वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड और ऑटोमेटेड मशीनों द्वारा होगी। इसमें किसी भी कर्मचारी या अधिकारी का सीधा दखल नहीं रहेगा, जिससे जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी। इससे फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने में होने वाली गड़बड़ियों और अनफिट वाहनों के सड़कों पर दौड़ने पर पूरी तरह रोक लगेगी। मानक पूरा करने और तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट पाए जाने वाले वाहनों को ही डिजिटल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
नियमों में बदलाव, निजी क्षेत्र की ली जाएगी मदद
कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई नई नीति में केंद्र सरकार के मोटर वाहन नियमों में किए गए हालिया संशोधनों को भी शामिल किया गया है। इसमें एटीएस की स्थापना, जमीन के मानक और उनके संचालन से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश तय किए गए हैं। इन जांच केंद्रों को स्थापित करने के लिए निजी क्षेत्र (प्राइवेट प्लेयर्स) का भी सहयोग लिया जाएगा।
खजाने पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ, रोजगार के नए अवसर
सरकार के अनुसार, इस पूरी परियोजना को लागू करने में राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। वहीं, प्रदेश भर में एटीएस के शुरू होने से तकनीकी, इंजीनियरिंग और अन्य गैर-तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) September 15, 2026









