मऊ

मऊ के पीस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

मऊ के पीस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के पैरा-3 में संशोधन कर धर्म आधारित प्रतिबंध को समाप्त करने की अपील की। इसके उपरांत जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया गया।
घोसी विधानसभा अध्यक्ष सनाउल्लाह आजमी ने कहा कि आजादी से पूर्व अनुसूचित जातियों पर धर्म आधारित कोई प्रतिबंध लागू नहीं था। 1950 में यह दर्जा केवल हिंदुओं तक सीमित था, जिसे बाद में 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म के लोगों के लिए विस्तारित किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि समान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में जीवन यापन करने के बावजूद दलित मुसलमानों को इस संवैधानिक अधिकार से वंचित रखा गया है।
ज्ञापन में सच्चर कमेटी (2006) और रंगनाथ मिश्र आयोग (2007) की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि आयोग ने दलित मुस्लिम व दलित ईसाई समुदायों को SC का दर्जा देने की स्पष्ट सिफारिश की थी। पीस पार्टी ने मांग की कि धर्म आधारित भेदभाव खत्म कर पात्र दलित मुस्लिमों को SC का दर्जा दिया जाए।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) August 22, 2026






















