सिद्धार्थनगर में नकली शराब के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, बस से सप्लायर समेत 3 गिरफ्तार

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद में नकली अंग्रेजी शराब के संगठित नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद में नकली अंग्रेजी शराब के संगठित नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। बांसी-डुमरियागंज मार्ग पर प्रतापपुर के पास 9 और 10 अगस्त की दरमियानी रात चलाए गए चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस टीम ने एक डबल डेकर बस से गिरोह के मुख्य सप्लायर को दबोच लिया।

तलाशी के दौरान पुलिस ने बस से 35,740 नकली ढक्कन, 4,900 नकली क्यूआर कोड, हरियाणा निर्मित 281 बोतल अंग्रेजी शराब, 20 लीटर स्प्रिट अल्कोहल, छह शीशी सेंट, 65 खाली शीशियां और तीन मोबाइल फोन बरामद किए। इसके साथ ही घटना में प्रयुक्त संदिग्ध डबल डेकर बस (संख्या UP-17 AT-6415) को भी पुलिस ने सीज कर दिया है।

अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान गोरखपुर निवासी राम प्रताप उर्फ गुरु प्रजापति, नई दिल्ली निवासी दीपक जायसवाल तथा संतकबीरनगर निवासी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी राम प्रताप पहले से ही एक मामले में वांछित था। तीनों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वे पहले भी शराब व गांजा तस्करी के मामलों में जेल जा चुके हैं।

पुलिस की यह सफलता 6 अगस्त को बांसी के सुभाष नगर (कोइलहवा) में हुई छापेमारी का नतीजा है, जहां एक किराये के मकान से 32,472 नकली ढक्कन, 12,740 नकली बारकोड और मिश्रित शराब बरामद की गई थी। उस दौरान गिरफ्तार बलराम जायसवाल और सरकारी शराब दुकान के मुंशी प्रदीप कुमार से पूछताछ में मुख्य सप्लायर राम प्रताप उर्फ गुरु प्रजापति का नाम सामने आया था। इसी सुराग पर काम करते हुए पुलिस ने इस मुख्य सप्लायर समेत तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह असली अंग्रेजी शराब की सीलबंद बोतलों को बेहद सफाई से खोलता था। उनमें से कुछ मात्रा में असली शराब निकालकर उसमें पानी, शक्कर और स्प्रिट का मिश्रण मिला दिया जाता था। इसके बाद बोतल पर नकली ढक्कन और क्यूआर कोड लगाकर उसे दोबारा सील कर दिया जाता था, जिससे आम खरीदार को असली और नकली का फर्क न पता चले।

पूछताछ में आरोपी दीपक जायसवाल ने स्वीकार किया कि जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात प्रमोद यादव से हुई थी। बाहर आने के बाद प्रमोद के जरिए वह गुरु प्रजापति के संपर्क में आया। इसके बाद हरियाणा से सस्ते दामों में शराब लाकर यूपी के विभिन्न जिलों में महंगे दामों पर बेचने का खेल शुरू हुआ। यह खेप मऊ, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर होते हुए लखनऊ ले जाई जा रही थी।

अगले ठिकाने और आबकारी विभाग की भूमिका पर जांच तेज

पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इतनी बड़ी तादाद में नकली ढक्कन और क्यूआर कोड कहां छापे जा रहे थे। इसके अलावा, लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। एएसपी प्रशांत कुमार प्रसाद ने कहा कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होंगी


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