बलिया
देश के जाने-माने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई की गूंज अब बलिया में भी सुनाई देने लगी है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

देश के जाने-माने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई की गूंज अब बलिया में भी सुनाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता सुशील पाण्डेय ‘कान्हजी’ ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन धरना स्थल से हटाने और अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर प्रश्नचिह्न
सपा प्रवक्ता सुशील पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोनम वांगचुक जी के खिलाफ की गई यह तानाशाही कार्रवाई केवल एक व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक के शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी जीवंत लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद, असहमति का सम्मान और संविधान द्वारा दिए गए नागरिक अधिकारों की रक्षा करना होता है। यदि शांतिपूर्ण और अहिंसक विरोध का जवाब बल प्रयोग से दिया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है।
असुरक्षा की भावना से ग्रसित है सरकार
सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए सुशील पाण्डेय ने कहा, “जो सरकार एक शांतिपूर्ण आंदोलन से भी भयभीत हो जाए, वह अपनी राजनीतिक शक्ति का नहीं, बल्कि अपनी चरम असुरक्षा का परिचय दे रही है।” उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में किसी भी मतभेद या समस्या का समाधान सिर्फ और सिर्फ संवाद से ही संभव है, दमन से नहीं। सरकार का मूल दायित्व जनता के विरोध की आवाज़ को दबाना नहीं, बल्कि उसे संवेदनशीलता से सुनना और लोकतांत्रिक तरीके से उसका समाधान निकालना है।
कायरतापूर्ण कार्रवाई से नहीं दबेगी जनता की आवाज़
सपा नेता ने केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को कायरतापूर्ण और कमजोर नेतृत्व की घिनौनी मानसिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भावना के विपरीत है। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की वास्तविक ताकत विरोध को कुचलने में नहीं, बल्कि विरोध की आवाज़ का सम्मान करने में निहित होती है।
सपा ने की दमनकारी नीतियां बंद करने की मांग
बयान के अंत में सपा प्रवक्ता ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का हर हाल में सम्मान किया जाए, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर दमनात्मक कार्रवाइयां तुरंत बंद हों और प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में असहमति जताना कोई अपराध नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान करना ही हर चुनी हुई सरकार का परम दायित्व है।
मुख्य बिंदु: बलिया में समाजवादी पार्टी ने सोनम वांगचुक के मुद्दे पर केंद्र को घेरते हुए यह साफ कर दिया है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के हनन के खिलाफ मुखर रहेगी। अब देखना यह है कि विपक्ष के इन तीखे हमलों पर सत्तापक्ष की क्या प्रतिक्रिया आती है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 20, 2026













