बड़ौत: मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को बचाने की उठी मांग, राज्यपाल के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बागपत

बागपत मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में बुधवार को बड़ौत तहसील में सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों का आक्रोश देखने को मिला।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

बागपत मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में बुधवार को बड़ौत तहसील में सामाजिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों का आक्रोश देखने को मिला। क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों व प्रबुद्ध वर्ग ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विश्वविद्यालय को प्रदेश की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक धरोहर बताते हुए इसे न गिराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की गई।

“संस्थान को ध्वस्त करना समाधान नहीं, विधिसम्मत निकाला जाए रास्ता”

एसडीएम कार्यालय पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश में समय-समय पर अनेक सरकारी व गैर-सरकारी भवनों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण से जुड़े मानचित्र एवं तकनीकी विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसी बड़े चलते हुए शिक्षण संस्थान को जमींदोज कर देना किसी भी समस्या का उचित और न्यायसंगत समाधान नहीं माना जा सकता।

सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु उठाए गए

जनता की पूंजी का सम्मान: कई सौ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह विश्वविद्यालय जनता की गाढ़ी कमाई और पूंजी से तैयार हुई एक बड़ी शैक्षणिक संस्था है।

छात्रों के भविष्य की चिंता: इस संस्थान से वर्तमान में हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य जुड़ा हुआ है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से विद्यार्थियों के करियर के साथ बड़ा खिलवाड़ होगा।

व्यावहारिक समाधान की मांग: यदि विश्वविद्यालय के निर्माण या मानचित्र से संबंधित कोई कानूनी या प्रशासनिक त्रुटि है, तो उसका समाधान ढहाने के बजाय विधिसम्मत, शमन या अन्य व्यावहारिक तरीके से किया जाना चाहिए।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई पर पुनर्विचार की अपील
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से गुहार लगाई कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। साथ ही, ध्वस्तीकरण की प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाते हुए पुनर्विचार किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि सरकार को ऐसा सकारात्मक एवं न्यायोचित निर्णय लेना चाहिए, जिससे कानून का इकबाल भी बुलंद रहे और विद्यार्थियों व आम जनता के हितों की भी रक्षा हो सके।

प्रतिनिधिमंडल में ये गणमान्य लोग रहे शामिल
इस अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मुख्य रूप से मुस्तैद रहे, जिनमें:

विधिक क्षेत्र से: एडवोकेट आकिब चौधरी एवं एडवोकेट संजीव कुमार

सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी: मोहम्मद आज़ाद चौधरी (अध्यक्ष, खिदमत फाउंडेशन, बड़ौत), समीर अहमद (अध्यक्ष, रक्तदान जीवनदान फाउंडेशन, बड़ौत), और परवीन कुमार (अध्यक्ष, श्रमिक एसोसिएशन)

जनप्रतिनिधि व अन्य: नगर पालिका परिषद बड़ौत के सभासद मेनुद्दीन अब्बासी, हाजी जमीरुद्दीन अब्बासी, जितेंद्र तोमर (मास्टर जी), लल्लू मिस्त्री, साजिद मूसा, रिजवान, सरफराज मास्टर जी, गुलजार और नदीम सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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