नवलपरासी/नेपाल
शौक, शिद्दत और अकीदत जब एक साथ मिलते हैं, तो वाकई इतिहास रच दिया जाता है। कुछ ऐसा ही अनोखा, अद्भुत और ऐतिहासिक नजारा इन दिनों भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के जिला नवलपरासी में देखने को मिल रहा है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

शौक, शिद्दत और अकीदत जब एक साथ मिलते हैं, तो वाकई इतिहास रच दिया जाता है। कुछ ऐसा ही अनोखा, अद्भुत और ऐतिहासिक नजारा इन दिनों भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के जिला नवलपरासी में देखने को मिल रहा है। आगामी मुहर्रम पर्व को लेकर दावा किया जा रहा है कि यहाँ इस बार नेपाल देश का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भव्य पारंपरिक ताज़िया तैयार किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए अभी से सरहद के दोनों पार के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है।
ऊंचाई इतनी कि दो विशालकाय क्रेनों की मदद से हो रहा है निर्माण
नवलपरासी जिले के लक्ष्मीपुर भुजहवा में बन रहा यह ताज़िया इस बार न सिर्फ नेपाल, बल्कि सीमावर्ती भारतीय इलाकों (जैसे उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और सिद्धार्थनगर) में भी भारी कौतूहल और चर्चा का विषय बना हुआ है। इस ताज़िये की भव्यता, विशालता और रिकॉर्डतोड़ ऊंचाई का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसे खड़ा करने और इसके विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए दो विशालकाय हाइड्रा क्रेनों की मदद लेनी पड़ रही है। दिन-रात दर्जनों कुशल कारीगर इस ऐतिहासिक शाहकार को मुकम्मल करने में पूरी अकीदत के साथ जुटे हुए हैं।
मक्का-मदीना के खूबसूरत और पवित्र नक्शे पर आधारित है डिजाइन
इस ताज़िये की सबसे बड़ी और मुख्य खासियत इसका बेजोड़ डिजाइन है। अकीदतमंदों और शिल्पकारों ने मिलकर इसे इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना के खूबसूरत नक्शे पर हूबहू तैयार किया है। इसकी महीन कलाकारी, इसके गुंबद, और इसकी गगनचुंबी मीनारें हूबहू मक्का-मदीना की वास्तुकला की याद दिलाती हैं। जो भी राहगीर या जायरीन इसे देख रहा है, वह इसके हुनर और भव्यता को देखकर बस देखता ही रह जा रहा है।
सरहद पार उमड़ा आस्था का सैलाब, लोगों ने कहा- ‘इतिहास में पहली बार’
स्थानीय लोगों का दावा: लक्ष्मीपुर भुजहवा के स्थानीय बुजुर्गों और नागरिकों का साफ कहना है कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में नेपाल के भीतर इतना बड़ा, इतना ऊंचा और इतना खूबसूरत कलात्मक ताज़िया पहले कभी नहीं देखा।
मुहर्रम के मुख्य पर्व से पहले ही इस अद्भुत ताज़िये को देखने के लिए नेपाल के विभिन्न प्रांतों सहित उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती गांवों से हजारों लोगों की भारी भीड़ रोजाना लक्ष्मीपुर भुजहवा पहुंच रही है। यह ताज़िया न सिर्फ धार्मिक अकीदत का प्रतीक है, बल्कि यहाँ के स्थानीय लोगों की आपसी एकता, सांप्रदायिक सौहार्द, कड़ी मेहनत और उनके बेमिसाल हुनर की एक जीती-जागती मिसाल बनकर उभर रहा है।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) June 25, 2026












