बुलंदशहर
बुलंदशहर केंद्र सरकार ने किसानों और गुड़-खांडसारी उद्योग के विरोध के बाद ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ का विवादित मसौदा औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर केंद्र सरकार ने किसानों और गुड़-खांडसारी उद्योग के विरोध के बाद ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026’ का विवादित मसौदा औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 29 मई को जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा कि राज्य सरकारों और हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद ड्राफ्ट पर पुनर्विचार जरूरी है।
विवाद के कारण वापस लिया मसौदा
इस मसौदे में नई चीनी मिलों के बीच न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करना, क्रशर और खांडसारी इकाइयों के लिए किसानों को FRP भुगतान अनिवार्य करना, और इन इकाइयों को चीनी मिलों जैसे सख्त नियमों में लाना जैसे प्रावधान शामिल थे। किसान संगठनों और गुड़-खांडसारी उद्योग का कहना था कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और चीनी मिलों का एकाधिकार बढ़ेगा।
जयंत चौधरी ने पहुंचाई किसानों की आवाज
राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इस मुद्दे पर कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ विचार-विमर्श कर किसानों की चिंताएं सरकार तक पहुंचाईं। भाकियू अराजनैतिक ने भी खाद्य विभाग के सामने हजारों किसानों के ईमेल और प्रस्ताव रखे। संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी मांगेराम त्यागी और समाजसेवी आशु खान ने कहा कि जयंत चौधरी ने किसानों की आवाज को मजबूती से सरकार तक पहुंचाया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
किसान नेताओं ने जताया आभार
भाकियू अराजनैतिक ने इस फैसले को किसान हितों की बड़ी जीत बताया। त्यागी ने कहा कि इससे किसानों, गुड़-खांडसारी उद्योग और ग्रामीण रोजगार को राहत मिली है। रालोद ने भी इसे “संवाद आधारित नीति निर्माण की मिसाल” करार दिया।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आगे की कार्रवाई से पहले ड्राफ्ट पर फिर से विचार किया जाएगा। फिलहाल 1966 का पुराना गन्ना नियंत्रण आदेश ही लागू रहेगा।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) May 30, 2026












