जौनपुर
जौनपुर जनपद के राजनीति में महत्वाकांक्षा और हकीकत के बीच की दूरी कभी-कभी बहुत बड़ी हो जाती है। मुंबई के बड़े व्यवसायी ज्ञान प्रकाश सिंह के साथ भी जौनपुर की राजनीति में कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर जनपद के राजनीति में महत्वाकांक्षा और हकीकत के बीच की दूरी कभी-कभी बहुत बड़ी हो जाती है। मुंबई के बड़े व्यवसायी ज्ञान प्रकाश सिंह के साथ भी जौनपुर की राजनीति में कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। भाजपा में अपनी जगह बनाने की लंबी कोशिशों के बाद, अब उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सुभासपा का दामन थामने के संकेत दे दिए हैं।
चाटुकारों के घेरे और भाजपा की ‘किलेबंदी’ ने बिगाड़ा खेल
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ज्ञान प्रकाश सिंह को उनके करीबियों और सलाहकारों ने यह भरोसा दिला दिया था कि केवल कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनने और चंदा देने से ही विधायक की कुर्सी मिल जाएगी। लेकिन भाजपा के भीतर पैर जमाए बैठे दिग्गजों और जौनपुर के जटिल सियासी समीकरणों ने उनकी राह रोक दी। जानकारों का मानना है कि ज्ञान प्रकाश उन ‘रणनीतिक धुरंधरों’ को पहचानने में चूक गए, जिन्होंने उन्हें केवल एक ‘संसाधन’ के रूप में इस्तेमाल किया।
राजभर से मुलाकात और नई सियासी पारी की सुगबुगाहट
पिछले दिनों लखनऊ में ओमप्रकाश राजभर से हुई मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि ज्ञान प्रकाश अब भाजपा का विकल्प ढूंढ चुके हैं। हाल ही में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का उनके पैतृक गांव गोधना पहुंचना इस चर्चा पर मुहर लगाता दिख रहा है।
जफराबाद और शाहगंज सीट पर दावेदारी
सुभासपा प्रमुख ने जौनपुर के अपने संक्षिप्त दौरे के दौरान जफराबाद और शाहगंज जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक दी है। सुभासपा को जहां एक संपन्न चेहरे की तलाश है, वहीं ज्ञान प्रकाश को एक ऐसे मंच की, जहाँ उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पंख मिल सकें।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘ओम’ के सानिध्य में ‘ज्ञान’ का राजनीतिक ‘प्रकाश’ जौनपुर की जनता को स्वीकार्य होता है या नहीं। फिलहाल, गठबंधन के समीकरणों ने जिले की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
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