सोशल मीडिया ने छीन ली ग्रिटिंग कार्ड वाली खुशी, क्या वास्तव में नववर्ष की शुभकामनाएं सोशल मीडिया पर पड़ जा रहीं फिकी?

ब्यूरो रिपोर्ट

सोशल मीडिया के इस दौर में किस तरह असली रिश्तों की रंग फिकी पड़ जा रही है? पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

वर्ष 2025 बीत गया और लोग 2026 के आगाज पर जश्न में डूबे हुए हैं। सोशल मीडिया के अनेक प्लेटफार्म पर लोग नववर्ष की मंगलकामना व शुभकामनाएं देते नजर आ रहे हैं, लेकिन ये शुभकामनाएं क्या वास्तव में दिल से दिल तक पहुंच रहीं हैं? सोशल मीडिया के इन शुभकामनाओं से क्या वास्तव में ग्रीटिंग कार्ड वाली शुभकामनाओं का आभास हो रहा है? आईए तर्क लगातें हैं कि सोशल मीडिया वाली शुभकामनाएं बेहतर हैं कि ग्रिटिंग कार्ड वाली शुभकामनाएं दिल तक पहुंचा करती थी?

सोशल मीडिया पर बंट रही शुभकामनाएं, ग्रिटिंग कार्ड के लिफाफों में रिश्तों की गहराई

सोशल मीडिया के इस युग ने केवल नींद, चैन, आराम ही नहीं छीना है, बल्कि रिश्तों की उन गहराइयों को छिछला कर दिया है, जो एक-दूसरे से मिलने के बाद अक्सर और गहरा हुआ करती थी।
सोशल मीडिया ने ग्रीटिंग कार्ड के उस दौर को छीन लिया है,जब स्कूली बच्चों के साथ-साथ अन्य लोग ग्रिटिंग कार्ड को जरिया बनाकर रिश्तों की डोर को मजबूत करते थे। एक-दूसरे से गले मिलकर और मिठाइयां बांटकर लोग नववर्ष पर शुभकामनाएं देते थे। उस दौर का वह ग्रिटिंग कार्ड, केवल कागज पर बनी एक तस्वीर ही नहीं थी, बल्कि रिश्तों और प्यार एवं आपसी प्रेम एवं सौहार्द की निशानी थी।

सोशल मीडिया, लोगों के बीच की दूरियों को कम कर सकता है, लेकिन क्या वास्तव में उन रिश्तों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ उस पल का आभास करा सकता है, जो मिलने के बाद सुकून मिला करता था?

सोशल मीडिया, रिश्तों के बीच की नजदीकियां बढ़ा सकता है, लेकिन गहराई को नहीं बढ़ा सकता। बाकी इस बारे में आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया जरूर सांझा करें।

 

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