बड़ौत
बागपत जनपद के बड़ौत में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर देरी से मिलने वाले ब्याज को लेकर दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त और महत्वपूर्ण रुख अपनाया है।

बागपत जनपद के बड़ौत में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर देरी से मिलने वाले ब्याज को लेकर दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त और महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जब नियमों में गन्ना भुगतान में विलंब होने पर किसानों को ब्याज देने का स्पष्ट प्रावधान है, तो फिर वर्षों से किसानों को ब्याज का भुगतान क्यों नहीं किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है
गन्ना आयुक्त व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश
हाईकोर्ट ने इस मामले में गन्ना आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के कड़े आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार और गन्ना आयुक्त से जवाब मांगा है कि ब्याज भुगतान का नियम लागू होने के बावजूद किसानों को उनके इस वैधानिक अधिकार से वंचित क्यों रखा गया।
न्यायालय ने आगामी सुनवाई तिथि 03 अगस्त 2026 तक पिछले आदेशों के अनुपालन में विलंबित गन्ना भुगतान पर किसानों को दिए गए ब्याज का पूरा विवरण और आंकड़े प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
चीनी मिलों की दलील पर हाईकोर्ट का करारा जवाब
सुनवाई के दौरान चीनी मिलों की ओर से यह तर्क रखा गया कि यदि किसानों को हजारों करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान करना पड़ा, तो कई चीनी मिलें बंद होने की कगार पर आ जाएंगी।
इस दलील पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा
यदि गन्ना किसानों की बदहाली हुई है, तो इसके लिए कोई न कोई जिम्मेदार अवश्य होगा।
हाईकोर्ट के इस रुख का किसान संगठनों ने पुरजोर स्वागत किया है। अंतर्राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) संजीव दांगी (निवासी लुहारी) ने कहा कि हाईकोर्ट का यह कदम किसानों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक है। उन्होंने सही समय पर गन्ना आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किए जाने के आदेश की सराहना की।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी गन्ना किसानों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें 03 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार और गन्ना विभाग को अदालत के समक्ष विस्तृत जवाब और आंकड़े प्रस्तुत करने होंगे।
बुलंदशहर जनपद के छतारी क्षेत्र के ग्राम लालगढ़ी में पिछले कई दिनों से दहशत का कारण बना मगरमच्छ आखिरकार वन विभाग के बिछाए जाल में फंस गया। सोमवार रात वन विभाग की टीम द्वारा लगाए गए बड़े पिंजरे में मगरमच्छ के कैद होते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। pic.twitter.com/b3sE9VR6FG
— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 28, 2026












