बुलंदशहर

बुलंदशहर जनपद के विधानसभा चुनावों से पहले जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेजी से बढ़ गई हैं। नेताओं द्वारा अपने सियासी ठिकाने बदलने का सिलसिला जारी है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

बुलंदशहर जनपद के विधानसभा चुनावों से पहले जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेजी से बढ़ गई हैं। नेताओं द्वारा अपने सियासी ठिकाने बदलने का सिलसिला जारी है। आपको बताते चले की शिकारपुर से राष्ट्रीय लोक दल के कद्दावर नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख मुकेश प्रमुख के बसपा में शामिल होने के बाद, अब भारतीय जनता पार्टी के एक और बड़े नेता ने बसपा का दामन थामने का फैसला कर लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के एक कद्दावर ब्लॉक प्रमुख की बसपा में जाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब केवल औपचारिक ऐलान बाकी है। यह नेता अगस्त माह में आधिकारिक तौर पर बसपा में शामिल होंगे। बसपा के टिकट पर इनका चुनाव लड़ना पूरी तरह तय माना जा रहा है।
जिले की सबसे चर्चित सीट पर बदलेंगे समीकरण
यह कद्दावर ब्लॉक प्रमुख जिले की सबसे चर्चित विधानसभा सीट से बसपा के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगे। माना जा रहा है कि इनके बसपा प्रत्याशी बनने से इस सीट पर चुनावी और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
सांसद के करीबी माने जाते हैं नेता
बसपा में शामिल होने जा रहे ब्लॉक प्रमुख को बुलंदशहर के सांसद डॉ. भोला सिंह का करीबी माना जाता है। जानकारी के अनुसार, सांसद ने उन्हें संबंधित सीट से भाजपा का टिकट दिलाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, यह विधानसभा क्षेत्र जाट बाहुल्य होने के कारण गठबंधन के तहत रालोद के खाते में जाती हुई दिख रही है, जिसके चलते नेता ने अपना नया ठिकाना चुन लिया है।
सीटों को लेकर भाजपा-रालोद गठबंधन में खींचतान
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार रालोद, भाजपा के साथ है। रालोद ने बुलंदशहर जिले की दो जाट बाहुल्य सीटों अनूपशहर और शिकारपुर पर अपनी दावेदारी ठोकी है।
फिलहाल जिले की सभी सात सीटों पर भाजपा का कब्जा है, जिससे रालोद का दावा थोड़ा कमजोर दिखता है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा जिले में रालोद को कम से कम एक सीट जरूर दे सकती है, ताकि गठबंधन का संगठन सक्रिय होकर जिले की सभी सातों सीटों पर प्रत्याशियों के लिए काम कर सके।
बागपत क्षेत्र के बौढ़ा गांव में पिछले पांच वर्षों (वर्ष 2021 से 2026) के दौरान कराए गए विकास कार्यों की जांच को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। गांव पहुंचे जांच अधिकारियों के समक्ष ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्तुत की गई अभिलेखीय सूची को बदलने का गंभीर आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। pic.twitter.com/m7JOC2P4H1
— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 21, 2026




















