महराजगंज
महराजगंज त्रिवेणी नदी से भटक कर एक कैनाल नहर में पहुंची और धीरे-धीरे महराजगंज के परतावाल के पास धरमौली बाजार के कनाल में फंसी दुर्लभ डॉल्फिन को आखिरकार एक बड़े संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बचा लिया गया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज त्रिवेणी नदी से भटक कर एक कैनाल नहर में पहुंची और धीरे-धीरे महराजगंज के परतावाल के पास धरमौली बाजार के कनाल में फंसी दुर्लभ डॉल्फिन को आखिरकार एक बड़े संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बचा लिया गया है। तीन दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही इस डॉल्फिन की जान बचाने के लिए तीन जिलों की वन विभाग टीमों, वन्यजीव विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने मिलकर अभूतपूर्व तत्परता दिखाई।
तेज बहाव और बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, सिंचाई विभाग से कम कराया पानी
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तर प्रदेश, श्रीमती अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक (गोरखपुर) बी.सी. ब्रम्हा के सीधे निर्देशन में डॉल्फिन को बचाने का रेस्क्यू ऑपरेशन कल भी चलाया गया था। लेकिन लगातार हो रही बारिश और कैनाल में पानी के अत्यधिक तेज बहाव के कारण रेस्क्यू टीमों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए सिंचाई विभाग से संपर्क किया और कैनाल के पानी को कम कराया गया। पानी का स्तर घटते ही आज कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज के अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास देवरिया कैनाल से इस रेस्क्यू को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया गया।
विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ ऑपरेशन, निकली 147 किलो की ‘प्रेग्नेंट’ डॉल्फिन
इस बेहद संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह और टीएसए (TSA) फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से संभाली। ऑपरेशन के दौरान गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर वन विभाग की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ धरातल पर डटी रहीं।
जाल से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद डॉल्फिन को तुरंत विशेष ‘डॉल्फिन एम्बुलेंस’ में शिफ्ट किया गया, जहां डॉ. योगेश द्वारा उसका प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में एक बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली बात सामने आई कि 7 फीट 2 इंच लंबी और 147 किलोग्राम वजन वाली यह डॉल्फिन एक मादा थी और वह गर्भवती (प्रेग्नेंट) थी। ऐसे में उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई थी।
पुलिस ने बनाया 52 किलोमीटर का ‘ग्रीन कॉरिडोर’, 65 मिनट में सफर पूरा
डॉल्फिन के प्राकृतिक और सुरक्षित घर के रूप में राजघाट के पास राप्ती नदी का चयन किया गया, क्योंकि राप्ती नदी डॉल्फिन के अनुकूल मानी जाती है। एम्बुलेंस में पानी से बाहर डॉल्फिन की जान को खतरा न हो, इसके लिए गोरखपुर पुलिस ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता दिखाई।
गोरखपुर पुलिस प्रशासन के समन्वय से भटहट से लेकर राजघाट तक एक विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार कराया गया, ताकि एम्बुलेंस को कहीं भी ट्रैफिक का सामना न करना पड़े। इसका परिणाम यह हुआ कि धरमौली के पास से राजघाट तक की लगभग 52 किलोमीटर की दूरी को मात्र 1 घंटे 5 मिनट के रिकॉर्ड समय में तय कर लिया गया। एम्बुलेंस के राजघाट पहुंचते ही बेहद सावधानी के साथ इस भारी-भरकम गर्भवती डॉल्फिन को राप्ती नदी की लहरों में सुरक्षित छोड़ दिया गया। नदी में पहुंचते ही डॉल्फिन पानी में ओझल हो गई।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 20, 2026













