महराजगंज

जनपद महराजगंज के करौता गांव के एक युवा साइकिलिस्ट ने विश्व पटल पर भारत का तिरंगा एक बार फिर पूरी शान से फहराया है। 19 जुलाई को इस जांबाज खिलाड़ी ने अपने ही दो पुराने विश्व रिकॉर्डों को ध्वस्त करते हुए पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

जनपद महराजगंज के करौता गांव के एक युवा साइकिलिस्ट ने विश्व पटल पर भारत का तिरंगा एक बार फिर पूरी शान से फहराया है। 19 जुलाई को इस जांबाज खिलाड़ी ने अपने ही दो पुराने विश्व रिकॉर्डों को ध्वस्त करते हुए, दुनिया के सबसे ऊँचे मोटरेबल पास ‘मिग ला टॉप’ (19,400 फीट) पर साइकिल से सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी कर अपना चौथा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है।

एक ही दिन में अपने ही रिकॉर्ड्स को किया पीछे
19 जुलाई का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब इस युवा ने समय को मात देते हुए एक के बाद एक कई कीर्तिमान स्थापित किए:
सुबह 10:30 बजे: उन्होंने माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (17,598 फीट) पर पूर्व में बनाए गए अपने विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
सुबह 11:57 बजे: उन्होंने काला पत्थर (18,192 फीट) पर स्थापित अपने ही दूसरे विश्व रिकॉर्ड को तोड़कर नई ऊँचाई छुई।
दोपहर 01:11 बजे: उन्होंने अंतिम लक्ष्य यानी विश्व के सबसे ऊँचे मोटरेबल पास मिग ला टॉप (19,400 फीट) पर साइकिल से पहुंचकर अपना चौथा ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर दिया।
BRO ने लगाई मुहर: दुनिया के पहले ऐसे साइकिलिस्ट बने
यह सफर कितना कठिन था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगातार 32 किलोमीटर की बेहद दुर्गम, पथरीली और सांसें रोक देने वाली चढ़ाई को उन्होंने मात्र 4 घंटे 25 मिनट 53 सेकंड में पूरा कर दिखाया। सीमा सड़क संगठन (BRO) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वह अब दुनिया के पहले ऐसे साइकिलिस्ट बन गए हैं, जिन्होंने इतनी भीषण ऊँचाई पर साइकिल चलाकर पहुंचने का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया है।
84 दिनों की तपस्या और बीमारियों से जीती जंग
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे 84 दिनों की कठिन तपस्या और 4,386 किलोमीटर की एक लंबी साइकिल यात्रा छिपी है। देश के 6 अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए इस सफर के दौरान उन्हें पीलिया (जॉन्डिस) और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों ने भी घेरा। हाड़ कंपाने वाली ठंड, ऑक्सीजन की भारी कमी और शारीरिक व मानसिक बाधाओं के बावजूद महराजगंज के इस लाल का हौसला कभी नहीं डगमगाया।
शहीदों को समर्पित किया रिकॉर्ड, दिया पर्यावरण का संदेश
अपनी इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जीत के बाद देश का मान बढ़ाने वाले इस साइकिलिस्ट ने अपनी सफलता को भारत के वीर शहीदों के चरणों में समर्पित किया है। इसके साथ ही उन्होंने पूरी दुनिया को एक बेहद जरूरी संदेश देते हुए कहा “यह विश्व रिकॉर्ड भारत के वीर शहीदों को समर्पित है। आइए, हम सब मिलकर पर्यावरण बचाने का संकल्प लें।”
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) July 20, 2026




















