संतकबीरनगर: आनंद गौतम हत्याकांड के बाद पुलिस छावनी में बदला गोनहा घाट; भारी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार, डीएम ने दी ₹50 हजार की तात्कालिक मदद

संतकबीरनगर

संतकबीरनगर जनपद के बखिरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए बहुचर्चित आनंद गौतम हत्याकांड के बाद शुक्रवार को सुरक्षा के कड़े और अभूतपूर्व प्रबंधों के बीच मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न करा दिया गया।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

संतकबीरनगर जनपद के बखिरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए बहुचर्चित आनंद गौतम हत्याकांड के बाद शुक्रवार को सुरक्षा के कड़े और अभूतपूर्व प्रबंधों के बीच मृतक का अंतिम संस्कार संपन्न करा दिया गया। क्षेत्र में फैले भारी तनाव और जन-आक्रोश को देखते हुए पूरे तटीय क्षेत्र और गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। गोनहा घाट पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मृतक की अंत्येष्टि की गई। इससे पूर्व, पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों ने सूझबूझ से नियंत्रित किया।

पोस्टमार्टम हाउस पर भड़का जन-आक्रोश; पुलिस से नोकझोंक और तोड़फोड़

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आनंद गौतम की जघन्य हत्या की घटना के बाद से ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। शुक्रवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही शव परिजनों को सौंपने की तैयारी हुई, वैसे ही उपस्थित भीड़ ने मुख्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ त्वरित व कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस दौरान न्याय की मांग कर रहे आक्रोशित प्रदर्शनकारियों और मुस्तैद पुलिस कर्मियों के बीच तीखी झड़प और नोकझोंक हुई। देखते ही देखते आक्रोशित लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस परिसर के भीतर हंगामा खड़ा कर दिया, जिसमें कुछ तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। ग्रामीणों का सीधा आरोप था कि पुलिस की शुरुआती कार्रवाई संतोषजनक नहीं है और वे मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने का प्रयास कर रही है।

डीएम आलोक कुमार और एसपी संदीप मीणा ने संभाली कमान; परिजनों को मनाया

अस्पताल परिसर में बवाल और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों आला अधिकारियों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पीड़ित परिवार के वरिष्ठ सदस्यों और रोते-बिलखते परिजनों से बंद कमरे में सीधे बातचीत की।

अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाएगा। कड़े विधिक आश्वासन और निष्पक्ष जांच के भरोसे के बाद ही पीड़ित परिवार शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुआ और शव को गोनहा घाट ले जाया जा सका।

आर्थिक सहायता की घोषणा; चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल मुस्तैद

पीड़ित परिवार को संबल प्रदान करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आलोक कुमार ने शासन की ओर से तात्कालिक राहत के रूप में 50,000 रुपये  की नकद आर्थिक सहायता राशि प्रदान की।

शुक्रवार देर शाम गोनहा घाट पर भारी पुलिस बल, पीएसी ( के जवानों और प्रशासनिक मजिस्ट्रेटों की निगरानी में मृतक का अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। हालांकि, एहतियात के तौर पर बखिरा क्षेत्र, बभनी चौराहा और पीड़ित के पैतृक गांव में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी बेहद सख्त है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए हैं।

 

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